ओबामा यात्रा : दोनों देश चाहे तों कश्मीर पर भूमिका निभा सकता है अमेरिका (लीड-2)

नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को यहां कहा कि उनका देश कश्मीर समस्या का हल उपलब्ध नहीं करा सकता, लेकिन दोनों देश यदि चाहें तो वह 'कोई भी भूमिका' निभा सकता है। साथ ही उन्होंने भारत-अमेरिकी सम्बंधों को अपरिहार्य बताया।

ओबामा ने कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच लम्बे अरसे से लम्बित विवाद बताते हुए कहा कि तनाव घटाना भारत और पाकिस्तान दोनों के हक में है।

उन्होंने कहा, "अमेरिका इस समस्या का समाधान नहीं उपलब्ध करा सकता।" ओबामा ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को संकेत दिया है "हमें कोई भी भूमिका निभाकर प्रसन्नता होगी..जो उनके तनाव को घटाने के लिए उचित हों।"

इस अवसर पर मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत, पाकिस्तान के साथ सभी मसले सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मनमोहन सिहं ने कहा, "संयत और शांत पाकिस्तान भारत, दक्षिण एशिया और सम्पूर्ण विश्व के हित में है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम पाकिस्तान के साथ वार्ता को प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकवादी ढांचे को समाप्त करने को कहा।

उन्होंने कहा, "आप एक ही समय वार्ता और आतंकवाद फैलाने वाला तंत्र बरकरार नहीं रख सकते।"

ओबामा ने पाकिस्तान के साथ शांति को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री के गम्भीर और सतत प्रयासों की सराहना की। ओबामा ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि भारतीय नेता ने निजी और सार्वजनिक दोनों जगहों पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव घटाने की मंशा जाहिर की है।

ओबामा ने कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शांति की मंशा के प्रति गम्भीर एवं प्रत्यनशील हैं। ..इसलिए मुझे उम्मीद है कि दोनों पक्ष इस सबसे जटिल मसलों में से एक के समाधान के लिए अगले कई महीनों, कई वर्षो में कोई तंत्र विकसित कर सकेंगे।"

ओबामा ने कहा कि वह भारत इसलिए आए क्योंकि वह मानते हैं कि भारत और अमेरिका के सम्बंध अपरिहार्य हैं। उन्होंने रविवार के 'शानदार रात्रिभोज' के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस भागीदारी का दायरा आतंकवाद और उग्रवाद से मुकबला करने से लेकर जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे मसलों तक है। उन्होंने प्रधानमंत्री को 'असाधारण बुद्धिजीवी और बेहद निष्ठावान' करार देते हुए कहा, "हमारे रिश्ते भी साधारण नहीं हैं।"

उन्होंने कहा कि वे भारतीय संसद और भारत की जनता से मुखातिब होने को उत्सुक हैं जिसमें वे इस बात पर चर्चा करेंगे दोनों देशों की भागीदारी को अगले स्तर पर कैसे ले जाया जाए।

ओबामा ने कहा कि मुम्बई में जिन प्रमुख व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए वे भारत को अमेरिका के शीर्ष व्यापारिक सहभागी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

ओबामा ने आउटसोर्सिग और मुम्बई में हुए व्यापारिक समझौते के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कहा कि आउटसोर्सिग के मसले पर दोनों देशों में पूर्वाग्रह से ग्रसित धारणा है जिसका कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसी कारण वह इस सच्चाई को उजागर कर रहे हैं कि इन समझौतों से अमेरिकी नागरिकों के लिए 50 हजार नौकरियां पैदा होने जा रही है और यह कोई एक तरफा मार्ग नहीं है।

ओबामा ने कहा, "जब कभी हमसे पूछा जाएगा कि भारतीय हमारी नौकरियां ले जा रहे हैं, तो मैं कहना चाहता हूं कि क्या आप जानते हैं कि उन्होंने हमारे लिए 50 हजार नौकरियां पैदा की है।"

उधर, मनमोहन सिंह ने कहा, "राष्ट्रपति ओबामा हमारे देश के बहुत गम्भीर और बेशकीमती दोस्त हैं और चर्चा के दौरान हम एकराय थे।"

उन्होंने कहा, "हमारी भागीदारी समान मूल्यों और हितों, विश्व के प्रति समान दृष्टिकोण और हमारी जनता की गहरी मैत्री पर आधारित है।"

प्रधानमंत्री ने कहा है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) जैसे बहुपक्षीय संगठनों में सदस्यता के लिए अमेरिकी समर्थन का भारत स्वागत करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह जैसे बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रक तंत्रों में भारत की सदस्यता के लिए अमेरिकी समर्थन का हम स्वागत करते हैं।"

मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और अमेरिका ने अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक वार्ता व्यापक करने और अफ्रीका तथा अफगानिस्तान में संयुक्त कदम उठाने का फैसला किया है।

ओबामा ने अपनी बात यह कहकर प्रारम्भ की कि दोनों पक्षों ने वैश्विक मसलों पर व्यापक चर्चा की है। उन्होंने कहा, "हम संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को 21 वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने सहित वैश्विक मसलों पर विचार-विमर्श के लिए सहमत हुए हैं।"

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ओबामा ने कहा कि दोनों देशों ने रणनीतिक सम्बंधों में समान भागीदारी की दिशा में काम करने का फैसला किया है जिसका विश्व शांति पर सकरात्मक और निर्णायक प्रभाव पड़ेगा।

यहां हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं की बैठक और शिष्टमंडल स्तर की बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का आगाज करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि दोनों देश अफगानिस्तान में संयुक्त परियोजनाएं शुरू करेंगे।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और अमेरिका ने आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए नई आंतरिक सुरक्षा वार्ता शुरू करने का फैसला किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुम्बई पर 2008 में हुए आतंकवादी हमले के बाद आतंकवाद से निपटने के उपायों में अमेरिका द्वारा मुहैया कराई गई मदद के लिए उन्होंने ओबामा का आभार जताया।

उन्होंने कहा, "हमारे बीच विस्तृत चर्चा हुई.. पूर्व एशिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया के बारे में। एशिया में सुरक्षा और समृद्धि के लिए हमारे बीच मुक्त और समावेशी क्षेत्रीय संरचना पर आधारित समान दृष्टिकोण है।"

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच परमाणु अस्त्रों रहित विश्व और इस दिशा में प्रयास करने के बारे में भी एकराय थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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