जी20 में वैश्विक मुद्रा विवाद के समाधान की उम्मीद
इसके लिए वैश्विक नेताओं को राष्ट्रहित से ऊपर उठकर सोचना होगा, हालांकि संकेत अभी बहुत उत्साहवर्धक नहीं हैं।
जी20 बैठक का आयोजन कर रहे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्यूंगबक ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी से धीरे-धीरे उबर रही है। ऐसे नाजुक समय में अगर हर देश अपने-अपने हित के लिए सोचेंगे, तो इससे संरक्षणवाद को बढ़ावा मिलेगा और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने अनेक मुश्किलें खड़ी होंगी।
हालिया वैश्विक चलन में देखा जा रहा है कि 2008 की मंदी से उबरने की कोशिशों के तहत अनेक देश अपने निर्यात को सस्ता करने और आयात को महंगा करने के लिए अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर रहे हैं।
उधर जी 20 की बैठक से पहले यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष बरोसो और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष वैन रोंपू ने एक संयुक्त घोषणा में जी 20 देशों से मुद्राओं के अवमूल्यण की प्रतियोगिता से निपटने का कुछ हल खोजने की अपील की है।
लेकिन एक ओर जहां ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला डा सिल्वा ने ब्राजील की हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाने की घोषणा कर चुके हैं, वहीं घरेलू राजनीतिक मोर्चे पर मिली असफलता के कारण बराक ओबामा से भी उदारता बरतने की उम्मीद नहीं की जा रही है।
उधर चीनी विशेषज्ञों ने भी कह दिया है कि चीनी अधिकारी चीन पर मुद्रा के अवमूल्यण के आरोपों का खुलकर विरोध करेंगे।
जी20 की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के इस रोचक सुझाव पर भी बहस होने की उम्मीद है कि अंतराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन पर कर लगाया जाना चाहिए।
इसके अलावा बैठक में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें फैसला लेने की प्रक्रिया में चीन और भारत जैसे उभरती अर्थव्यवस्था को अधिक भागीदारी देने का विचार है।
उधर जी 20 शोध समूह के जॉन किटरेन ने कहा है कि इस बैठक में व्यापार की बाधाओं को दूर करने के दोहा प्रस्ताव, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अधिक प्रगति की उम्मीद नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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