'भारत-अमेरिका के गहराते सम्बंधों को लेकर चिंतित न हों'
विश्लेषकों और पूर्व राजनयिकों ने 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' को बताया कि इस्लामाबाद को ओबामा के भारत दौरे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।
पूर्व विदेश सचिव शमशाद अहमद ने कहा, "हम यह उम्मीद क्यों कर रहे हैं कि राष्ट्रपति ओबामा को पाकिस्तान का भी दौरा करना चाहिए? क्या हम भारत का हिस्सा हैं।"
अखबार ने अहमद के हवाले से कहा है, "हमारी चिंताएं केवल रणनीतिक मुद्दों तक सीमित होनी चाहिए। हमें इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए कि कौन भारत का दौरा कर रहा है।"
जब पूर्व राजनयिक रियाज खोखर से कहा गया कि अतीत में ओबामा के पूर्ववर्तियों ने एक ही यात्रा में भारत और पाकिस्तान का दौरा किया था। इस पर उन्होंने कहा, "वे दौरे नहीं थे, बल्कि मात्र थोड़े समय के ठहराव थे।"
खोखर ने कहा कि वास्तविकता यह है कि ओबामा द्वारा 26/11 को लेकर पाकिस्तान का नाम लेना बंद कर देना, इस बात का संकेत है कि वह मुम्बई हमले पर भारत के सुर में सुर नहीं मिलाना चाहते।
खोखर ने आगे कहा कि वह नहीं समझते कि ओबामा का यह दौरा इस क्षेत्र में कोई चमत्कारिक बदलाव लाएगा।
विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिका वर्षो से भारत और पाकिस्तान के साथ अपने सम्बंधों को अलग-अलग बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
कैद-ए-आजम युनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर इश्तियाक अहमद के हवाले से मीडिया ने कहा है, "राष्ट्रपति ओबामा का भारत दौरा उसी रणनीति का हिस्सा है।"
अहमद ने 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' को बताया कि ओबामा प्रशासन पाकिस्तान को नजरअंदाज नहीं कर सकता, क्योंकि यह भारत के साथ अपने सम्बंध को बेहतर बनाना चाहता है।
अहमद ने कहा, "मौजूदा परिदृश्य में इस क्षेत्र में पाकिस्तान की एक प्रमुख भूमिका है।"
विदेश विभाग के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने कहा, "हमें आशा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत दौरा दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में योगदान करेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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