प.बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे नहीं रहे (लीड-1)
कोलकाता, 6 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पंजाब के राज्यपाल और अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके सिद्धार्थ शंकर रे का शनिवार को दक्षिण कोलकाता स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे।
स्व. रे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा वर्ष 1975 में देश में लागू किए गए आपातकाल के सूत्रधार के रूप में भी जाने जाते थे।
रे अपने पीछे अपनी पत्नी एवं पूर्व सांसद माया रे को छोड़ गए हैं। रे दंपति को कोई संतान नहीं थी।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार रे को गुर्दे से सम्बंधित एवं अधिक उम्र होने के कारण कई तरह की परेशानियांथीं।
प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी चित्तरंजन दास के नवासे रे ने 1972 से 1977 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने अपने राज्य में नक्सलवाद को कुचलने में अहम भूमिका निभाई थी।
उन्होंने न केवल अपने राज्य में अपना दबदबा कायम किया था, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। पंजाब में जिस दौरान खालिस्तानी उग्रवाद चरम पर था, रे को दो अप्रैल 1986 को वहां का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
वर्ष 1988 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के.पी.एस. गिल के सहयोग से वह उग्रवाद को कमजोर करने में कामयाब रहे।
सन् 1920 में जन्मे रे राजनीति के क्षेत्र में कूद पड़े और उन्हें पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिधान चंद्र राय के मंत्रिमंडल में 1960 में शामिल कर लिया गया।
वर्ष 1967 में इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में वह बतौर शिक्षा मंत्री रहे। बाद में उन्हें राष्ट्रपति शासन के तहत पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया गया।
वर्ष 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने उन्हें अमेरिका में भारत का राजदूत नियुक्त किया था। उन्होंने 1996 तक यह जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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