हिंगोट युद्ध में योद्धाओं को आईं मामूली चोटें

इंदौर (मध्य प्रदेश), 6 नवंबर (आईएएनएस)। इंदौर के गौतमपुरा इलाके में वर्षो से चली आ रही परंपरा के तहत दीपावली के अगले दिन शनिवार को भी हिंगोट युद्ध हुआ। तुर्रा और कलंगी के योद्धाओं ने जमकर एक दूसरे पर हिंगोट से हमला किया। इस बार योद्धाओं के साथ ढाल भी थी, इसलिए 20 योद्धाओं को मामूली चोटें लगने की खबर है।

शनिवार को गौतमपुरा में एक बार फिर तुर्रा और कलंगी गांव के लोग जमा हुए और फिर शुरू हुआ हिंगोट युद्ध। दोनों ओर से हिंगोट छोड़े गए। कुछ ही देर में दोनों ओर से छोड़े जाने वाले हिंगोट ने मैदान और आकाश को युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया। लगभग दो घंटे चले इस युद्ध में 20 से ज्यादा लोगों को चोटें आईं।

गौतमपुरा के थाना प्रभारी अरुण कुमार ने आईएएनएस को बताया कि हिंगोट युद्ध स्थल के दोनों ओर घायलों के उपचार की व्यवस्था की गई थी। घायलों की सूचना पुलिस या थाने तक नहीं आई। चोट लगी भी होगी तो सामान्य होगी। इस बार युद्ध में हिस्सा लेने वाले कुछ प्रतिभागियों को विधायक सत्यनारायण पटेल की ओर से ढाल भी दी गई थी।

ज्ञात हो कि देपालपुर क्षेत्र में हिंगोट युद्ध की तैयारी काफी पहले से शुरू हो जाती है। इसके लिए हिंगोट फल (नारियल से मेला खाता) को लोग दीपावली से लगभग दो माह पहले खोखला कर सुखा लेते हैं, फिर उसके भीतर बारूद भरी जाती है और एक तरफ लकड़ी लगाई जाती है। युद्ध के दौरान जब इसमें आग लगाई जाती है तो वह रॉकेट की तरह आकाश में उड़ान भरता हुआ दूसरे पक्ष को आघात पहुंचाता है।

वर्षो से चली आ रही यह परम्परा कब और किसने, किस उद्देश्य को लेकर शुरू की, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इस युद्ध में न तो कोई जीतता है और न ही किसी की हार होती है, शनिवार को भी ऐसा ही हुआ। यहां के प्रतिभागी भी हार-जीत के लिए नहीं, बल्कि परम्परा को निभाने के लिए यहां पहुंचकर हिंगोट से प्रहार करते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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