सिद्धार्थ शंकर रे की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि
कोलकाता, 7 नवंबर (आईएएनएस)। शोक में डूबे सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे को अंतिम विदाई दी। रविवार को उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
देश में वर्ष 1975 में आपातकाल की घोषणा का मसौदा तैयार करने वाले के रूप में जाने जाने वाले 90 वर्षीय दिग्गज राजनेता का अंतिम संस्कार केवड़ातला श्मशान घाट पर किया गया।
उन्होंने दक्षिणी कोलकाता स्थित अपने आवास पर शनिवार की शाम अंतिम सांस ली थी। उनके गुर्दो ने काम करना बंद कर दिया था, जिस कारण वह काफी दिनों से बीमार थे।
अंत्येष्टि स्थल पर पुलिस के जवानों ने वाहन से उनके पार्थिक शरीर को उतारा और धीमी कदमताल के साथ ऊंचे बने चबूतरे पर सजी चिता पर रखा। जवानों ने शस्त्र उलटा कर उन्हें सलामी दी। दिवंगत रे के भतीजे ने मुखाग्नि दी। रे का अंतिम संस्कार उसी जगह किया गया, जहां उनके नाना प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी चित्तरंजन दास की अंत्येष्टि की गई थी।
स्व. रे राजनीति में आने से पहले नामचीन बैरिस्टर थे। वर्ष 1992 से 1996 के बीच उन्होंने अमेरिका में भारतीय राजदूत का दायित्व सफलतापूर्वक निभाया।
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख एवं रेल मंत्री ममता बनर्जी रे के परिवार से मिलने के बाद शवयात्रा में आगे-आगे चलीं।
केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल के प्रभारी के रूप में, फिर 1972 से 1977 तक अपने मुख्यमंत्रित्व काल में रे राज्य में नक्सलवाद को कुचलने में कामयाब रहे। इस कारण उन्हें काफी विवाद भी झेलना पड़ा था।
रे ने ममता बनर्जी को सत्तारूढ़ वाम मोर्चा के विरुद्ध संघर्ष में वर्षो तक सहयोग दिया था।
रे के पार्थिव शरीर को दोपहर लगभग एक बजे उनके बेलतला स्थित आवास से अर्थी पर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा राज्य विधानसभा, कालकत्ता उच्च न्यायालय, ईडेन गार्डन और चित्तरंजन सेवा सदन जैसे प्रमुख स्थानों से होकर गुजरी।
विधाससभा भवन में मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य, उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मानस भुइयां एवं बड़ी संख्या में विधायकों ने रे के पार्थिव शरीर पर फूल-माला अर्पित की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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