ओबामा यात्रा : ओबामा ने विद्यार्थियों से कहा, जन सेवा से जुड़ें
सेंट जेवियर्स कॉलेज में एचआर कॉलेज ऑफ कामर्स एंड इकॉनॉमिक्स के एक विद्यार्थी की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में ओबामा ने कहा, "मैं नहीं चाहता कि कोई युवा व्यक्ति उपेक्षित हो। कोई स्वस्थ भौतिकवाद अच्छा है। लेकिन यदि आप सभी भौतिक उपलब्धि के बारे में सोच रहे हैं तो यह महत्वाकांक्षा की गरीबी है।"
ओबामा ने कहा, "मैं समझता हूं कि भारत और अमेरिका में दोनों जगह चुनावी राजनीति के बारे में एक स्वस्थ अनिश्चितता की स्थिति है। भारत में कुछ मामलों में निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र से अधिक तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। मैं आशा करता हूं कि आप में से कुछ लोग सार्वजनिक सेवा से जुड़ेंगे।"
ओबामा ने कहा, "लेकिन भारत को आपकी जरूरत सिर्फ व्यापारी के रूप में नहीं होगी, बल्कि एक नेता के रूप में भी, जिससे कि सरकार अधिक जिम्मेदार और महत्वपूर्ण बनेगी। अन्यथा सरकार में एक असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाएगी।"
ओबामा ने भौतिक पूंजी के संदर्भ में महात्मा गांधी का उदाहरण भी दिया।
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "जब मैं मणि भवन में गांधी के कक्ष में था, तो उस कमरे में जो वस्तुएं थीं, उनमें एक चटाई, एक चर्खा, चप्पलें, कुछ कागजात थे। और ऐसे व्यक्ति ने इन सीमित संसाधनों के जरिए इतिहास को इस कदर बदल दिया कि 20वीं सदी में आज तक कोई वैसा नहीं कर पाया, खासतौर से इस संदर्भ में कि उन्होंने कितने लोगों के जीवन को प्रभावित किया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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