आज मुंबई पहुँचेंगे बराक ओबामा

हालांकि भारतीय अधिकारियों ने ओबामा की इस यात्रा से बहुत उम्मीदें बांध रखी हैं और वे मान रहे हैं कि ओबामा कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ करेंगे लेकिन ख़ुद ओबामा स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका ध्यान अमरीकी उत्पादों के लिए भारत में बाज़ार बढ़ाने और अमरीका में रोज़गार बढ़ाने पर होगा.
यह तो साफ़ दिख रहा है कि बराक ओबामा की पहली भारत यात्रा को लेकर वैसा उत्साह नहीं है जैसा कि जॉर्ज बुश या बिल क्लिंटन की यात्रा के दौरान था. लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि इन बरसों में दोनों देशों के बीच संबंध इतने प्रगाढ़ हो चुके हैं कि अब पहले जैसे उत्साह की कोई वजह नहीं बची है.
ओबामा की भारत यात्रा उनके दस दिवसीय एशिया यात्रा का हिस्सा है. माना जा रहा है कि वे एशिया के उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से अमरीका के रिश्ते मज़बूत करना चाहते हैं लेकिन साथ वे एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के ख़िलाफ़ एक संदेश भी देना चाहते हैं. यह सिर्फ़ संयोग नहीं है कि राष्ट्रपति ओबामा अपनी यात्रा की शुरुआत भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से कर रहे हैं. मुंबई में उसी ताज होटल में ठहरेंगे जिसे चरमपंथियों ने अपना निशाना बनाया था. वे दिन भर विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.
इसके बाद वे दिल्ली पहुँचेंगे और यहाँ भारतीय राजनेताओं से मुलाक़ात करेंगे. हालांकि बराक ओबामा ने स्पष्ट कर दिया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता का मामला जटिल और पेचीदा है. लेकिन फिर भी भारत को उम्मीद है कि वे कुछ सकारात्मक कहेंगे. कूटनीति के जानकार कहते हैं कि सरकारी स्तर पर ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है लेकिन वे कहते हैं कि अगर ओबामा कुछ कहते हैं तो इसका अच्छा असर होगा.
भारत चाहता है कि अमरीका इसरो और डीआरडीओ पर लगे प्रतिबंध को हटाए जिससे उच्च तकनीक व्यापार क्षेत्र में कुछ रास्ता खुले लेकिन अमरीका में इसकी प्रक्रिया जटिल है और यह अभी शुरु भी नहीं हुई है. भारत चाहेगा कि बराक ओबामा कश्मीर पर कुछ न कहें और चरमपंथ पर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ा बयान दें. वह वीज़ा फ़ीस बढ़ाने और आउटसोर्सिंग पर भी ओबामा से ठोस आश्वासन चाहेगा. लेकिन यह कहना मुश्किल है कि राष्ट्रपति ओबामा क्या कहेंगे.
राष्ट्रपति ओबामा ऐसे समय पर भारत आ रहे हैं जब उन्हें अपने देश में एक बड़ी राजनीतिक पटखनी मिली है और वे निचले सदन यानी कांग्रेस में अपनी पार्टी का बहुमत खो दिया है. उन्हें हार की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए मानना पड़ा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार की मंद गति से मतदाता नाराज़ हैं. तो अपनी इस एशिया यात्रा के दौरान बराक ओबामा की भरपूर कोशिश होगी कि अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए वे जितनी कोशिशें कर सकते हैं वे करें.
ओबामा के साथ इस यात्रा में लगभग 200 अमरीकी कारोबारी आ रहे हैं. व्हाइट हाउस ने पहले ही यह बताया है कि ओबामा भारत में प्रमुख अमरीकी कारोबारी दिग्गजों से मिलेंगे और भारत में कारोबार के अवसर पर चर्चा करेंगे. बराक ओबामा की कोशिश होगी कि वे परमाणु दायित्व क़ानून के प्रावधानों को नरम करवा सकें और यदि यह संभव न हो तो कम से कम ऐसा कोई रास्ता निकले जिससे दुर्घटना की स्थिति में अमरीकी कंपनियों को ज़िम्मेदारियों से मुक़्त किया जा सके.
वे भारत के प्रतिरक्षा क्षेत्र के कुछ ठेके हासिल करना चाहेंगे और चाहेंगे कि परमाणु संयंत्रों और व्यापार के क्षेत्र में ठोस प्रगति हो सके. कृषि के क्षेत्र पर भी अमरीका की नज़र है लेकिन भारत अभी इसके लिए तैयार नहीं दिख रहा है.












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