झारखण्ड में बिना बिल के खर्च हुए 6700 करोड़ रुपये
वर्ष 2000 में राज्य के गठन के बाद खर्च किए गए 6,700 करोड़ रुपये का अधिकारियों ने सरकार को कोई हिसाब नहीं दिया है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस धनराशि को सरकारी कोष से पहले ही भुगतान के तौर पर निकाल लिया गया है। सभी सरकारी विभागों में हिसाब से जुड़ा बिल लंबित पड़ा हुआ है।
अधिकारियों ने खर्चो का संक्षिप्त ब्योरा (एसी) राज्य सरकार को दिया है जबकि इसका विस्तृत ब्योरा (डीसी) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग)के पास जमा किया है।
राज्य के वित्त सचिव सुखदेव सिंह ने आईएएनएस को बताया, "हमने अधिकारियों को जल्दी से संक्षिप्त और विस्तृत ब्योरा मुहैया कराने को कहा है।"
सरकारी सूत्रों ने बताया कि राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा खर्च किए गए 2,178 करोड़ रुपये की बिल अभी भी लटकी हुई है।
एक सूत्र ने बताया, "अधिकारियों ने खर्चो से जुड़ी बिल पेश नहीं की है। वे लेखा जोखा से खुद को बचा रहे हैं। स्वयं को बचाने के लिए अधिकारी ऐसे कदम उठाते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications