ओबामा यात्रा : 'भारत की प्रगति का समर्थन करता है अमेरिका' (लीड-2)
अपनी भारत यात्रा के पहले दिन ओबामा ने यहां होटल ट्राइडेंट में आयोजित व्यापार सम्मेलन में कहा, "हम भारत की प्रगति का सम्मान करने के साथ ही इसका समर्थन भी करते हैं। भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार से दोनों देशों को लाभ पहुंचेगा।"
दोनों देशों के व्यापार जगत के 400 उद्यमियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि भारत और अमेरिका का संबंध 21वीं शताब्दी में साझेदारी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण और निर्णयकारी भूमिका निभाएगा।"
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए अपार क्षमताएं हैं। भारत जो आयात करता है, उससे दस प्रतिशत से कम अमेरिका से आता है और अमेरिका जो निर्यात करता है, उसका दो प्रतिशत भारत में जाता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एक दूसरे के निर्माण में सहयोग किया है।
अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव और उसमें रिपब्लिकन से डेमोक्रेट्स को मिली हार का संदर्भ देते हुए ओबामा ने कहा कि यहां से वापस जाने पर अमेरिकी 'भारत के साथ करारों से होने वाले लाभ' का स्वागत करेंगे।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2003 की तुलना में वर्ष 2009 में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार बढ़कर दोगुना हो गया। अमेरिका इस बात से चिंतित है कि व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में रहा है।
वर्ष 2010 के पहले आठ महीनों में दोनों देशों के बीच 32 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है जिसमें भारत का आयात 20 प्रतिशत और निर्यात 40 प्रतिशत बढ़ा है। दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार अगले कुछ साल में 50 अरब डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद है।
इस बैठक में भारत-अमेरिका सीईओ फोरम के सह अध्यक्ष डेविड कोट और टाटा सन्स के अध्यक्ष रतन टाटा, पेप्सीको की अध्यक्ष इंद्रा नूयी, बोइंग के जिम मेक्नेर्ने और जनरल इलेक्ट्रिक के जेफ्री इमेल्ट को आमंत्रित किया गया। इस समारोह का आयोजन 'यूनाइटेड स्टेट्स इंडिया बिजनेस काउंसिल' (यूएसआईबीसी) की तरफ से किया गया था।
इस यात्रा के दौरान भारत के साथ 15 अरब डॉलर के व्यापार समझौतों के जरिए अमेरिका में 54,000 रोजगार सुरक्षित किए जाएंगे।
इन समझौतों में भारत की कम बजट एयरलाइंस स्पाइस जेट द्वारा 33 बोइंग 737 विमानों की खरीद और भारतीय स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों के लिए जनरल इलेक्ट्रिकल्स के 414 इंजनों की आपूर्ति का सौदा भी शामिल है।
ओबामा ने भारत की कुछ रक्षा कम्पनियों से निर्यात प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। इन कम्पनियों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) और रक्षा शोध एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) शामिल हैं।
ओबामा ने कहा कि अमेरिका भारत को भविष्य के बाजार के रूप में देखता है। आर्थिक साझेदारी बढ़ाने के लिए दोनों देशों को कदम उठाने की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया में तेजी से उभर रहीं अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वर्ष 2010 में दोनों देशों को व्यापारिक संबंधों से एक दूसरे को लाभ पहुंचा है और यह व्यापार दोनों देशों के हित में रहा है।
ओबामा ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच 10 अरब से अधिक डॉलर के 20 से अधिक समझौते होंगे, इससे अमेरिका में 50 हजार नौकरियां सुरक्षित होंगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत में किए जाने वाले अपने निर्यात को अगले पांच साल में दोगुना करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि करीब 30 लाख भारतीय-अमेरिकी दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कृषि, विज्ञान और आधारभूत संरचना में भारत और अमेरिका सहयोग 21वीं सदी में मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ उच्च तकनीक में सहयोग हो सकता है। उच्च तकनीक के दोहरे इस्तेमाल पर अमेरिका अनावश्यक प्रतिबंध नहीं रखना चाहता।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी और भारतीय कंपनियां एक दूसरे के यहां निवेश कर रही हैं। भारत अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है, जिससे अमेरिका में हजारों नौकरियां पैदा हो रही हैं। इसके अलावा भारतीय कंपनियों के निवेश से अमेरिका में 10 हजार रोजगार उत्पन्न होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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