भोपाल त्रासदी : ओबामा को खुला खत, अमेरिका बदले दोहरे मापदंड

भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति के बैनर तले गैस पीड़ितों ने शनिवार को यूनियन कार्बाइड संयंत्र के सामने प्रदर्शन कर एक खुला पत्र लिखा। इस पत्र में कहा गया है 26 वर्ष पूर्व हुए हादसे ने हजारों लोगों की जान ली है और कई लाख लोग अब भी बीमारियों की गिरफ्त में हैं। इसके अलावा संयंत्र परिसर में जमा रासायनिक कचरे से भूजल प्रदूषित हो रहा है।

पत्र में कहा गया है कि एक तरफ अमेरिका मैक्सिको की खाड़ी में पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने वाली ब्रिटिश कंपनी पर अरबों रुपये का जुर्माना लगाती है, वहीं अमेरिका की कंपनियां भोपाल हादसे के शिकार लोगों को चंद हजार रुपये ही देती है। यहां भी इन कपनियों ने पर्यावरणीय प्रदूषण फैलाया है और भूजल को जहरीला बनाया, फिर भी भोपाल गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को अमेरिका में संरक्षण मिल रहा है।

पीड़ितों की ओबामा से मांग है कि वह अमेरिकी कंपनियों पर दबाव डालें कि वे भारतीय कानून एवं फैसलों को माने तथा न्याय दिलाने में दोहरे मापदंड को आधार न बनाएं।

सनद रहे कि भोपाल में 26 साल पहले यूनियन कार्बाइड संयंत्र से रिसी जहरीली गैस ने हजारों लोगों को अपना शिकार बनाया था। गैस प्रभावित अब तक 25 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हादसे के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड और डाउ केमिकल्स का नाता अमेरिका से है। लिहाजा, गैस पीड़ितों ने ओबामा से मांग की है कि वह इन दोनों कंपनियों को बाध्य करें कि वे भारतीय कानून एवं फैसले को मानें।

गैस पीड़ितों ने ओबामा को लिखे खत में मांग की है कि वह एंडरसन को भारत को सौंपें, पीड़ितों

को अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप मुआवजा दिलाएं और अन्यायपूर्ण परमाणु समझौते को रद्द करें।

वहीं पांच संगठनों के बैनर तले पीड़ितों ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र के सामने प्रदर्शन कर नारेबाजी की। पीड़ितों के प्रतिनिधि ओबामा से मुलाकात करना चाहते हैं और इसी मांग को लेकर वे दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना देंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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