'अमेरिकी चुनाव परिणामों का भारत के साथ रिश्ते पर असर नहीं'
वाशिंगटन, 6 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका की भारत नीति को द्विदलीय समर्थन के कारण अमेरिकी अधिकारी नई दिल्ली के साथ गहराते रिश्ते को राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से लगातार बढ़ावा मिलने की उम्मीद करते हैं, भले ही हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव पर रिपब्लिकनों का कब्जा क्यों न हो जाए।
विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "भारत के मामले में अच्छी बात यह है कि भारत के प्रति हमारी विदेश नीति को लेकर द्विदलीय सहमति है। इसलिए मध्यावधि चुनाव के परिणामों का भारत-अमेरिका के सम्बंधों पर कोई असर नहीं होगा।"
अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "मैं समझता हूं कि इस गहराते और मजबूत होते रिश्ते को हर तरफ से लगातार बढ़ावा मिलेगा।"
भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते के बाद दोनों देशों के सम्बंधों में अगली बड़ी उपलब्धि के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, "हमारा ध्यान किसी एक वस्तु पर नहीं है। हमारा लक्ष्य अब बड़ी वस्तुओं के पूरे समूह को हासिल करने को लेकर है।"
ओबामा के दौरे के पूर्व खासतौर से कुछ बताने से परहेज करते हुए अधिकारी ने स्वच्छ ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बारे में बात कही। इसके अलावा इस बारे में भी कि प्रौद्योगिकी किस तरह नागरिकों तक सरकार के बारे में अधिक जानकारी मुहैया करा सकती है।
अधिकारी ने दोनों देशों के बीच रक्षा सम्बंधों के बारे में कहा, "हो सकता है कि इस दौरे के दौरान ऐसा न हो पाए, लेकिन हमें आशा है कि एमआरसीए (बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान) सौदे के लिए किसी अमेरिकी कम्पनी को ही चुना जाएगा।"
अधिकारी ने कहा, "यह सौदा इस बारे में एक सकारात्मक संकेत देगा कि हम किस तरीके से भविष्य में एक साथ काम करेंगे।"
ज्ञात हो कि वायु सेना हेतु 126 लड़ाकू विमानों के 10 अरब डॉलर के इस सौदे के लिए बोइंग और लॉकहीड जैसी दो अमेरिकी कम्पनियां दावेदार हैं।
अधिकारी ने कहा कि 'कन्वेंशन ऑन सप्लीमेंटरी कम्पेनसेशन' (सीएससी) पर भारत द्वारा हस्ताक्षर किया जाना खबर का एक शानदार हिस्सा था। हालांकि "दोनों पक्षों के बीच अभी भी चर्चा जारी है और मैं इस बारे में नहीं कह सकता" कि कम्पनियां किस तरह परमाणु करार को आगे बढ़ाती हैं। "निश्चित रूप से हम एक साफ मैदान का इंतजार कर रहे हैं।"
विवादास्पद एच1बी वीजा की शुल्क वृद्धि के बारे में अधिकारी ने स्वीकार किया कि "भारतीय कम्पनियां बहुत खुश नहीं हैं। लेकिन कुल मिलाकर इसमें कोई संदेह नहीं है कि दोनों देशों के बीच शानदार आर्थिक सम्बंध है, जो लगातार बढ़ता रहेगा और समृद्ध होता रहेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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