भारत ने नक्सलियों के मुद्दे पर नेपाल से बात की
काठमांडू, 6 नवंबर (आईएएनएस)। भारत सरकार ने नेपाल के पूर्व माओवादी लड़ाकों द्वारा भारतीय नक्सलियों को गोपनीय तरीके से प्रशिक्षण देने, उन्हें हथियार मुहैया कराने और राजनीतिक समर्थन दिए जाने के मुद्दे पर नेपाल सरकार से बात की है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल की विदेश मंत्री सुजाता कोइराला, गृह मंत्री भीम रावल, और विदेश व गृह सचिवों को इस बारे में एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि दो वर्तमान सांसदों सहित कई माओवादी नेताओं ने नक्सलियों को प्रशिक्षण देने के लिए तीन भारतीय नक्सली नेताओं के साथ एक गुप्त समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं।
नेपाली मीडिया में शनिवार को लीक हुए दूतावास के इस पत्र के मुताबिक इन माओवादी नेताओं में बर्षामान पुन अनंत भी शामिल हैं, जो कि माओवादियों की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के कमांडरों में से एक, तथा निर्वाचित संसद सदस्य हैं। इसके अलावा सांसद हरिबोल गजुरेल का नाम भी इसमें शामिल है।
पत्र के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले भारतीय नक्सली नेताओं में बिहार के सीतामढ़ी जिले के निवासी पंकज के अलावा बिनोद गुरंग और रजाक अंसारी शामिल हैं। अंसारी कथित रूप से भारत-नेपाल के सीमावर्ती इलाके, नेपालगंज का निवासी है और नकली भारतीय मुद्रा का एक गिरोह चलाता है।
पत्र में कहा गया है कि इस समझौते पर दक्षिणी नेपाल के सरलाही जिले में हस्ताक्षर किया गया था। समझौते में पीएलए के सदस्यों को भारतीय नक्सलियों को प्रशिक्षण देने के लिए बिहार के मोतिहारी और सीतामढ़ी जिलों में भेजने पर भी सहमति जताई गई है।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि नेपाली माओवादियों ने इस वर्ष नेपाल की धरती पर दो चरणों में लगभग 300 भारतीय नक्सलियों को प्रशिक्षित किया था।
पत्र में कहा गया है कि जून में नेपाल के औद्योगिक शहर बुटवाल से लगे हरिखोला के जंगल में एक प्रशिक्षण शिविर स्थापित किया गया था। आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य, लतीफ खान विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए यहां पाकिस्तान से आया था।
पत्र में लिखा गया है कि दो महीने बाद लगभग 50 भारतीय नक्सलियों के लिए एक दूसरा प्रशिक्षण शिविर पीएलए के एक शिविर में आयोजित किया गया था।
पत्र में कहा गया है कि इस सैनामैना शिविर में अगस्त में लगभग 50 भारतीय नक्सलियों को प्रशिक्षित किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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