दीपावली की धूम, रोशनी से नहाया पूरा देश (राउंडअप)
दीपावली का त्योहार त्रयोदशी से शुरू होकर पांच दिन तक अर्थात भैया दूज तक चलता है। इसके पांच पर्व हैं- धनतेरस, काली चौदस, दीपावली, नूतन वर्ष और भैया दूज। दीपावली पर मुख्य रूप से घर की सफाई की जाती है और दीये जलाए जाते हैं। साफ-सफाई जहां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है वहीं दीये हमें अंधकार से प्रकाश की ओर जाने के लिए प्रेरित करते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रोशनी का त्योहार दीपावली उमंग के साथ मनाया जा रहा है। लोगों ने अपने घरों और दुकानों को रंग-बिरंगी रंगोलियों और गेंदा फूलों से सजाया है। यहां के घरों, दुकानों और मंदिरों में लक्ष्मी पूजा की तैयार की जा रही है। लोग आपस में मिठाइयों का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित एवं दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को शहरवासियों से अपील की कि वे सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाएं।
प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित अपने संदेश में दीक्षित ने कहा है, "पटाखों के बगैर दीपावली मनाना सबसे अच्छा है।" उन्होंने बच्चों का आान किया कि वे पटाखों की बजाय दीये जलाकर, रंगोली बनाकर और मिठाइयों एवं उपहारों का आदन-प्रदान कर त्योहार मनाएं।
एक अन्य संदेश में दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे रात 10 बजे से सुबह छह बजे के बीच पटाखे न जालाएं। साथ ही कहा गया है, "हमें ध्वनि प्रदूषण में कमी लानी चाहिए।"
दिल्ली पुलिस की ओर से हिदायत दी गई है कि बच्चों के पटाखे जलाते समय घर के बड़े सदस्य उनके साथ रहें, ताकि कोई दुर्घटना न हो।
छात्रा शिवा चावला को दीपावली में विशेष भोजन पसंद है जो उनकी मां हर बार बनाती हैं। शिवा ने कहा, "सुबह के समय मैं अपने माता-पिता के साथ मंदिर गई। इसके बाद हम पहाड़गंज स्थित अपनी दुकान में गए और वहां लक्ष्मी पूजा की। हमने गरीबों में दान-दक्षिणा और मिठाइयां बांटीं।"
चण्डीगढ़ से आकर दिल्ली में पढ़ाई करने वाले पंकज सूरी ने बताया, "मैं यहां रह रही अपनी बड़ी बहन के घर उनके परिवार के साथ दीपावली मनाने गया। सुबह में पूजा के बाद हमने घरों को गेंदा फूल और रंगोलियों से सजाया। हम कुछ रिश्तदारों के यहां जाएंगे और उन्हें उपहार एवं मिठाइयां देंगे। हमने रात में जलाने के लिए ढेर सारे पटाखे लिए हैं।"
यहां के घरों में फूलों और भगवान गणेश के आकार की रंग-बिरंगी रंगोलियां बनाई जाती हैं।
गणेश के आकार की रंगोली बनाने वाली 24 वर्षीय कीर्ति मेहता ने कहा, "मैं रंगोली बनाने में रंगीन पाउडर का इस्तेमाल करती हूं, उस पर दीये, मोमबत्तियां और फूल की पंखुड़ियां बिखेर देती हूं।" उन्होंने कहा, "शाम के समय घर की चौखट और बालकनी में हम दीये, मोमबत्तियां और फैंसी लाइट जलाते हैं।"
दक्षिणी राज्य तमिलनाडु शुक्रवार को पटाखों की आवाज से जगा और दीयों की कतार के मनोहारी दृश्य देखने के लिए वह पूरी तरह तैयार है। रोशनी का त्योहार दीपावली यहां उत्साह से मनाया जा रहा है।
राज्यभर में लोगों ने मित्रों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ मिठाइयों, सेवरी (सुगंधित पौधा) एवं लेघियम (जड़ी-बूटी का मुरब्बा) का आदान-प्रदान किया।
रिश्तेदारों और मित्रों ने एक-दूसरे से पूछा, "गंगा स्नान कर लिया?" यहां दीपावली के अवसर पर यह पूछने का रिवाज है।
चेन्नई के एक निवासी जे. मुरलीधरन ने आईएएनएस को बताया, "यहां दीपावली के दिन की शुरुआत बच्चों द्वारा जलाए गए पटाखों की आवाज से हुई। पारंपरिक तैल-स्नान के बाद हम पूजा के लिए निकट के मंदिर में गए।"
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने शुक्रवार को बच्चों से अपील की कि वे पटाखे नहीं, रोशनी से दीपावली मनाएं।
यहां के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित अपने संदेश में धूमल ने कहा, "प्रदूषण रोकने और हवा में कार्बन की मात्रा को कम कर स्वच्छ हिमाचल बनाने के लिए हमें रोशनी फैलानी है, धुआं नहीं। आइए, हम सब सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाएं।"
बच्चों से अपील में धूमल ने कहा कि अंधाधुंध पटाखे जलाने से बचना चाहिए, क्योंकि पटाखों से न केवल पर्यावरण को क्षति पहुंचती है, बल्कि आंखों, गला और श्वसन-तंत्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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