जबरदस्ती भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हैं ममता
एक निजी बांग्ला समाचार चैनल स्टार आनंदा में बुधवार रात एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति नहीं करती है कि आज जिसका विरोध करे, कल उसी के पक्ष में हो जाएं।
केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में भूमि अधिग्रहण सुधार विधेयक पेश करने का वादा किया है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसी कल्याण कार्यो के लिए भूमि का अधिग्रहण करना चाहती है तो इसका तरीका मैत्रीपूर्ण होना चाहिए। अगर भूमि का मालिक जमीन देना चाहे, तभी उसकी जमीन ली जानी चाहिए।
मुआवजे के बारे में उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो जबरदस्ती भूमि नहीं ली जानी चाहिए। और अगर किसी से कोई भूमि ली जाती है, तो उसके परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भूमि का विकास करने के बाद भूमि का 10 फीसदी हिस्सा उसे वापस किया जाना चाहिए। अगर उसके परिवार में कोई नौकरी करने की योग्यता नहीं रखता है तो परिवार को 30 सालों के लिए पेंशन दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा उस जमीन से रोजी-रोटी चलाने वाले भूमिहीनों के हितों की भी सुरक्षा की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ चलाए गए जबरदस्त आंदोलन के कारण टाटा मोटर्स को अपनी नैनो परियोजना को सिंगूर से हटाकर गुजरात के आनंद ले जाना पड़ा था। इसके अलावा राज्य सरकार के नंदीग्राम को रासायनिक हब बनाने की योजना को भी वापस लेना पड़ा था।
इन्हीं अभियानों के कारण बंगाल में पिछले दो सालों से ममता को चुनावी जीत हासिल हो रही है।
कांग्रेस भूमि अधिग्रहण की नीति में सुधार के लिए हरियाणा के मॉडल को अपनाने के पक्ष में है, जिसमें भूमि की खरीद बाजार भाव पर की जाती है और भूस्वामी को 33 सालों तक सलाना भत्ता दिया जाता है।
भू अधिग्रहण कानून 1894 को बदलने वाले प्रस्तावित नये भूमि अधिग्रहण सुधार विधेयक में प्रावधान है कि अगर किसी अधिग्रहण से बड़े पैमाने पर विस्थापन हो, तो उसका समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकण किया जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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