'अमरीका में नौकरियां बचाईं हमने'

'अमरीका में नौकरियां बचाईं हमने'

सुशील झा

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

फिक्की का कहना है कि भारत ने भी नौकरियां बचाई हैं अमरीका में

भारतीय उद्योग जगत के अनुसार अमरीका और भारत आर्थिक स्तर पर बेहतरीन सहयोगी साबित हो सकते हैं क्योंकि दोनों देश एक दूसरे के यहां नौकरियां बचा रहे हैं.

भारतीय उद्योग महासंघ यानी फिक्की और अर्न्स्ट एंड यंग ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि कैसे भारतीय कंपनियों ने अमरीका में हज़ारों नौकरियां बचाई हैं और कैसे भारत अमरीका का एक अच्छा सहयोगी साबित हो सकता है.

अमरीका और भारत के राजनीतिक रिश्तों को परमाणु समझौते के बाद नया आयाम मिला है लेकिन आर्थिक रिश्ते हमेशा से आउटसोर्संग के मुद्दे पर खट्टे मीठे ही रहे हैं. अब राष्ट्रपति ओबामा के भारत आने से पहले फिक्की और अर्नेस्ट यंग की रिपोर्ट दिखाती है कि किस तरह दोनों देश एक दूसरे पर कई मामलों में निर्भर हैं. इस संबंध में जानकारी देने के लिए अमरीका में भारत की राजदूत मीरा शंकर भी मौजूद थीं.

उनका कहना था, ‘‘ये रिपोर्टें बताती है कि किस तरह भारत ने अमरीका में साढ़े पाँच अरब का निवेश किया है और कई नौकरियां बचाई हैं. इससे पहले एक और रिपोर्ट आई थी मैरीलैंड यूनिवर्सिटी की जिसमें मर्जर और एक्वीज़िशन के आकड़े भी शामिल थे जिसके अनुसार भारत का कुल निवेश 25 अरब डॉलर के क़रीब है. निश्चित रुप से इससे अमरीका में नौकरियां बची हैं.’’

अर्नेस्ट एंड यंग की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2004 से 2009 के बीच अमरीका में भारी निवेश किया है जिससे कम से कम 40 हज़ार नौकरियां बची हैं या नई नौकरियां आई हैं.

फिक्की के अध्यक्ष अमित मित्रा का कहना था कि दोनों देशों के संबंध अलग तरहके बन सकते हैं.

उनका कहना था, ‘‘ दुनिया के इतिहास में कम ही ऐसा हुआ होगा कि एक विकसित देश और एक विकासशील देश के ऐसे संबंध हों जहां दोनों एक दूसरे के देशों में नौकरियां बचा रहे हों या नई संभावनाएं पैदा कर रहे हों. जब ओबामा यहां होंगे तो हम उनसे ये बात साफ साफ कहेंगे कि आपके विदेशी निवेश से हमारे यहां नौकरियां आई हैं तो हम भी पीछे नहीं रहे हैं अमरीका की नौकरियां बचाने में.’’

भारतीय कंपनियों का प्रभाव दुनिया भर में बढ़ रहा है ये बात किसी से छुपी नहीं है लेकिन इसके बावजूद क्यों दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में आउटसोर्सिंग का मुद्दा छाया रहता है.

मीरा शंकर कहती हैं, ‘‘ असल में ये एक ऐसा विषय है जिस पर हम लगातार काम कर रहे हैं. ये एक दिन की बात नहीं है. हम वर्षों से इस पर काम कर रहे हैं. हम अमरीका को यही संदेश देना चाहते हैं कि इस संबंध से उन्हें भी फायदा है और हमें भी. दोनों के लिए कोई नुकसान नहीं है इस संबंध में.’’

अमरीका मंदी की मार से अभी तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है जबकि दूसरी तरफ भारत पर मंदी की मार कम ही पड़ी है. राष्ट्रपति ओबामा अपनी भारत यात्रा में मुंबई में ज्यादा समय रहेंगे जिससे साफ़ है कि उनका ध्यान बिजनेस पर अधिक होगा. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारतीय अर्थजगत इन रिपोर्टों के ज़रिए न केवल आउटसोर्सिंग को लेकर अमरीकी जनमानस बल्कि अमरीकी नेतृत्व को भी एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रहा है.

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