उद्योग जगत पंचायतों में निवेश की संभावनाएं तलाशे : जोशी
नई दिल्ली में एसोसिएशन ऑफ चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज (एसोचेम) द्वारा 'ग्रामीण भारत में विदेशी निवेश की संभावनाएं' विषय पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में जोशी ने सोमवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि संविधान के 73वें संशोधन के बाद भी पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उद्योग जगत ने कभी नहीं सोचा। उन्होंने उद्यमियों से पूछा कि क्या अब हम ग्रामीण विकास के संदर्भ में पंचायतों को विकास की इकाई मानकर रूपरेखा तैयार कर सकते हैं?
जोशी ने ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्रामीण इलाकों में चलाई जा रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन और ग्रामीण पेयजल जैसी विभिन्न योजनाओं की चर्चा करते हुए बताया कि इन योजनाओं से गांवों में न केवल आर्थिक सुधार हुआ है बल्कि विकास के लिए मजबूत आधार भी बना है।
उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के लिए भारत के ग्रामीण इलाके लाभदायक साबित होंगे। भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह 2009 में 80 हजार करोड़ रुपये पार कर गया था, जो अपने आप में महत्वपूर्ण है। यह स्थिति उम्मीद जगाती है कि भारत में आर्थिक विकास का स्थायित्व है और इसलिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक आकर्षित होंगे।
उन्होंने कहा है कि अब तक ग्रामीण इलाकों में उद्योग और खान क्षेत्र में ही विदेशी निवेशकों ने अपनी पूंजी लगाई किन्तु आने वाले दिनों में वे ग्रामीण इलाकों में हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास और सेवा क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए उसमें भी निवेश करने के लिए आकर्षित होंगे।
उन्होंने कहा कि यह दु:ख की बात है कि पिछले 60 साल में देश के विभिन्न राज्यों का संतुलित विकास नहीं हुआ और दूसरी ओर गुजरात व महाराष्ट्र आर्थिक रूप से सक्षम बन गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications