मौद्रिक समीक्षा में महंगाई के असर डालने की आशंका
रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव 11.30 बजे दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे।
मौद्रिक समीक्षा से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रिजर्व बैंक से उम्मीद जताई है कि वह विकास की रफ्तार को बरकरार रखने और महंगाई दर पर अंकुश लगाने के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश करेगा, क्योंकि साधारण आदमी के लिए दोनों ही महžवपूर्ण है।
आर्थिक सम्पादकों के सलाना सम्मेलन में वित्त मंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि सरकार ने आपूर्ति और मांग दोनों तरफ कदम उठाए हैं। आपूर्ति के मामले में रिजर्व बैंक ने अतिरिक्त तरलता कम करने के लिए कदम उठाए हैं।
उन्होंने हालांकि कहा कि सरकार तरलता कम करते हुए मुद्रा संकट पैदा नहीं कर सकती। कभी-कभी कीमतों पर अंकुश लगाना संभव नहीं होता है। बल्कि सरकार उसके असर को कम करने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि सरकार रियायती दर पर खाद्य पदार्थ उपलब्ध करा रहे हैं।
इससे पहले मध्य तिमाही समीक्षा में रिजर्व बैंक ने दरों में 25 से 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी।
रिजर्व बैंक इस साल जनवरी से लगातार महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए दरों में बढ़ोतरी कर रहा है। उसने पहली बार 29 जनवरी को, उसके बाद 19 मार्च को, फिर 2 जुलाई को, उसके बाद 27 जुलाई को और पांचवीं बार 16 सितम्बर को महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए दरों में लगातार बढ़ोतरी की।
बहरहाल उद्योग जगत और वाणिज्यिक बैंकों को उम्मीद है कि दरों को नहीं बदला जाएगा।
कारोबारी जगत की तीन प्रतिनिधि संस्थाओं ने उम्मीद जताई है कि दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन एस. श्रीधर ने कहा कि आशा की जानी चाहिए कि आरबीआई दरों में बढ़ोतरी नहीं करेगा, क्योंकि इससे त्योहारों के मौसम में ऋण की मांग पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
फिर भी रिजर्व बैंक ने दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इंकार नहीं किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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