'पार्सल बम यात्री विमान से ले जाया गया'

ये बम गत्ते के डिब्बे में बंद था और अमरीका जाना था
क़तर एयरवेज़ का कहना है कि पिछले हफ़्ते जो दो पार्सल बम यमन से भेजे गए थे उनमें से एक को दो यात्री विमानों से ले जाया गया था.
अब तक ये समझा जा रहा था कि ये बम मालवाहक विमानों पर लदे थे.
क़तर एयरवेज़ ने बीबीसी को बताया कि ये बम उनके ए 320 विमान पर राजधानी सना से दोहा पहुंचा.
वहां से वो क़तर एयरवेज़ के ही एक अन्य विमान पर दुबई ले जाया गया जहां पुलिस ने उसे ज़ब्त कर लिया.
इस बम में पीईटीएन नामक विस्फोटक था जो हवाई अड्डे की सामान्य सुरक्षा जांच में पकड़ में नहीं आता.
दूसरा बम ब्रिटेन के ईस्ट मिडलैंड हवाईअड्डे पर मिला. ये दोनों बम प्रिंटर की टोनर कार्ट्रिज में छिपाए गए थे.
इन पार्सल बमों को भेजने के लिए अमरीकी मालवाहक कंपनी यूपीएस और फ़ैडएक्स का इस्तेमाल किया गया था और इनपर अमरीका के शिकागो शहर के सिनगॉग के पते लिखे थे.
एक ही व्यक्ति का काम
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इसके पीछे सऊदी अरब में जन्मे इब्राहिम हसन अल असीरी का हाथ लगता है.
असीरी को अरब प्रायद्वीप में अल क़ायदा का एक प्रमुख नेता माना जाता है.
ये संगठन बम बनाने की आधुनिक और नई तकनीकों का विकास कर रहा है.
पिछले साल सऊदी अरब के ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख शहज़ादा मोहम्मद बिन नयीफ़ पर हुए आत्मघाती हमले की योजना में असीरी के भाई का हाथ बताया गया था.
हालांकि शहज़ादा इस हमले में बच गए थे लेकिन बम में पीईटीएन विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था.
अमरीका के आतंकवाद विरोधी शीर्ष अधिकारी जॉन ब्रैनन का कहना है कि अधिकारियों को विश्वास है कि जिस व्यक्ति ने ये प्रिंटर बम बनाए उसी ने जांघिया बम भी बनाया था जिससे पिछले साल क्रिसमस के दिन एक अमरीकी विमान पर विस्फोट करने का विफल प्रयास किया गया था.
युवती से पूछताछ
उस समय अरब प्रायद्वीप के अल क़ायदा ने इसकी ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी.
जॉन ब्रैनन ने कहा, "ये बहुत ही ख़तरनाक आदमी है. इसे काफ़ी प्रशिक्षण मिला है और ये अनुभवी है. हमें जल्दी से जल्दी इसे खोज निकालने की ज़रूरत है जिससे इसे क़ानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके."
उन्होने बताया कि वो विदेशों में अपने सहयोगियों के साथ काम कर रहे हैं जिससे ये पता लगाया जा सके कि हाल में यमन से कितने पार्सल भेजे गए.
यमन के अधिकारी उस छात्रा से पूछताछ कर रहे हैं जिसने इन पार्सल बमों को पोस्ट किया और जिसका मोबाइल नंबर डाक कंपनी के दफ़्तर में छोड़ा गया था.
मानवाधिकार संगठनों ने इस 22 वर्षीय युवती का नाम हनान अल समावी बताया है.
अधिकारियों ने पहले कहा था कि ये मेडिकल की छात्रा है लेकिन बाद की रिपोर्टों में कहा गया कि ये सना विश्वविद्यालय में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग पढ़ती हैं और इसके किसी इस्लामिक चरमपंथी से संबंध नहीं मालूम होते.


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