श्रीलंकाई तमिल प्रवासियों से नकारात्मकता त्यागने का अनुरोध
एम.आर. नारायण स्वामी
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। श्रीलंका में राजनीतिक दल के रूप में परिवर्तित हो चुके एक तमिल आतंकी समूह ने एक बेहतर राजनीतिक हैशियत हासिल करने के लिए तमिल प्रवासियों से 'यथार्थवादी' होने का अनुरोध किया है। दल ने कहा है कि तमिल टाइगर्स अब इतिहास बन चुका है।
राजनीतिक दल 'द ईलम पीपुल्स रिवोल्यूशनरी लिबरेशन फ्रंट' (ईपीआरएलएफ) ने पेरिस में हुए दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विश्व भर में फैले तमिल प्रवासी समुदाय से इस आशय का अनुरोध किया है।
श्रीलंका से बाहर रहने वाले तमिल समुदाय में इस मुद्दे पर काफी चर्चा के बाद ईपीआरएलएफ का यह अनुरोध सामने आया है। प्रवासी तमिल समुदाय कई रूपों में कभी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) का समर्थन किया था।
ईपीआरएलएफ के एक नेता ने आईएएनएस को बताया, "तमिलों के राजनीतिक समाधान के लिए प्रवासी लोगों को यथार्थवादी बनने की जरूरत है। नकारात्मक राजनीति त्यागने का समय आ गया है।"
उन्होंने बताया, "युद्ध अब समाप्त हो गया है, तमिलों के राजनीतिक मुद्दों के लिए लोगों को अब दूसरा तरीका अपनाना चाहिए। एलटीटीई से अपनाई गई नकारात्मक राजनीति और इसके समर्थक स्थिति को और खराब करेंगे।"
ईपीआरएलएफ का यह अनुरोध लिट्टे समर्थक तमिल प्रवासी वर्ग की उस मंशा के बाद आया है जो आज भी श्रीलंका के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्वतंत्र तमिल ईलम राज्य बनाने के विचार को कायम रखना चाहता है।
श्रीलंका में ईपीआरएलएफ कभी एक आतंकवादी संगठन था। वर्ष 1987 से 90 के बीच जब यहां के पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारतीय सेना की तैनाती हुई तो उसने प्रांतीय प्रशासन की अध्यक्षता की थी।
पेरिस में गत 23 से 24 अक्टूबर के बीच हुई बैठक में श्रीलंका, फ्रांस, ब्रिटेन, स्विटजरलैंड और जर्मनी से 40 शिष्टमंडल शामिल हुए थे। बैठक में श्रीलंका की स्थिति और तमिल प्रवासी समुदाय के बारे में चर्चा की गई। बैठक में इस बात को महसूस किया गया कि एलटीटीई का खात्मा तमिल लोगों के हित में था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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