प्रधानमंत्री ने अमेरिका से सम्बंधों को सराहा (राउंडअप)

प्रधानमंत्री के विशेष विमान से, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत पहुंचने के एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यहां शुक्रवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सम्बंध एक नए चरण में प्रवेश कर गया है।

तीन एशियाई देशों की यात्रा के समापन के मौके पर कई सारे विषयों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ आदान-प्रदान जारी रखने के अलावा भारत के पास और कोई विकल्प नहीं है।

जापान, मलेशिया की यात्रा पूरी कर वियतनाम से स्वदेश लौटते समय प्रधानमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली और बीजिंग अपने सीमा विवाद का एक व्यावहारिक समाधान चाहते हैं।

प्रधानमंत्री सिंह ने हनोई में अपनी दिन भर की व्यस्तता के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ 45 मिनट तक मुलाकात की। इस व्यस्तता के बीच उन्होंने भारत-आसियान और पूर्वी एशिया शिखर बैठकों में हिस्सा लिया और साथ ही तीन द्विपक्षीय बैठकों में भी आयोजित की।

मनमोहन सिंह ने क्लिंटन के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते में एक गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने की दोनों देशों की एक जैसी इच्छा है।

प्रधानमंत्री ने स्वदेश लौटते समय मार्ग में संवाददाताओं को बताया, "भारत-अमेरिका के सम्बंध एक नए चरण में प्रवेश कर गए हैं। हमारे बीच सौहाद्र्र है, समझदारी है। अपने रिश्ते में गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने की हमारी सामूहिक इच्छा है।"

उन्होंने कहा, "हमारे बीच आर्थिक और रणनीतिक बातचीत हुई है। हम रणनीतिक साझेदार हैं।"

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) शिवशंकर मेनन के अनुसार, "हम असैन्य परमाणु सम्बंध को आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। परमाणु ऊर्जा विभाग अमेरिकी कम्पनियों के साथ बातचीत कर रहा है। ये व्यावहारिक चर्चाएं हैं।"

पाकिस्तान के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा कि अपने पड़ोसी होने के नाते पाकिस्तान के साथ आदान-प्रदान के लिए भारत बाध्य है, लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि नई दिल्ली ने विभिन्न मुद्दों पर अपने रुख को त्याग दिया है।

वियतनाम से स्वदेश लौटते समय रास्ते में भारतीय पत्रकारों से प्रधानमंत्री ने कहा, "पाकिस्तान के साथ आदान-प्रदान हमारी नीति है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हमने घुटने टेक दिया है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने अक्सर यह बात कही है कि हम मित्र चुन सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं चुन सकते। पाकिस्तान के साथ आदान-प्रदान के लिए हम बाध्य हैं।"

इसके साथ ही मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ सभी मुद्दों पर सम्पूर्णता में बातचीत की है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने सीमा विवाद का एक व्यावहारिक समाधान चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विवाद की समाप्ति तक भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखना है।

हनोई में शुक्रवार सुबह वेन के साथ हुई अपनी मुलाकात के बारे में सिंह ने कहा, "हमने सभी मुद्दों पर सम्पूर्णता में बातचीत की।"

सिंह ने कहा कि दोनों देशों ने सीमा विवाद का एक व्यावहारिक समाधान निकालने के बारे में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसी सीमा विवाद के कारण 1962 में दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था। दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र पर दावा करते हैं।

मनमोहन सिंह ने कहा, "फिलहाल, सीमा पर शांति और सौहाद्र्र बनाए रखा जाना चाहिए।"

एक पत्रकार ने पूछा कि क्या चीन भारत के सामने नरम पड़ रहा है। सिंह ने कहा कि वह नरम-गरम के मामले में नहीं पड़ना चाहते। "रिश्ते में जो कुछ गलतफहमी है, उसे समाप्त किया जाना चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने वेन को आमंत्रित किया है और निकट भविष्य में वह भारत आएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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