भाजपा व अलगाववादियों ने किया वार्ताकारों का बहिष्कार (राउंडअप इंट्रो-1)
जम्मू, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के लिए नियुक्त दो वार्ताकारों ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने राज्य में अलगाववादियों को छोड़ कर बाकी सभी पक्षों से मुलाकात की। वार्ताकारों ने बुधवार की शाम जम्मू में भी कोट भालवाल जेल में कैद अलगाववादी नेताओं से मिलने की कोशिश की, लेकिन अलगावादियों ने यहां भी उनसे मिलने से इंकार कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी जम्मू में वार्ताकारों का बहिष्कार किया।
हुर्रियत कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता शब्बीर अहमद शाह ने केंद्र सरकार के वार्ताकारों से यह कहते हुए मिलने से इंकार कर दिया कि उनसे मिलने का कोई मतलब नहीं है। जेल में कैद अन्य अलगाववादी नेताओं ने भी वार्ताकारों से मिलने से इंकार कर दिया।
आधिकारिक सूत्रों ने आईएएनएस से इस बात की पुष्टि की कि पत्रकार दिलीप पडगांवकर और शिक्षाविद राधा कुमार कोट भालवाल जेल गए, जहां अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंदराबी कैद हैं। लेकिन उन्होंने वार्ताकारों से मिलने से इंकार कर दिया।
पडगांवकर ने हालांकि संवाददाताओं से कहा कि वह अलगाववादी नेताओं और उनके विचारों का सम्मान करते हैं, "लेकिन भारतीय गणराज्य के एक नागरिक के रूप में मेरा भी सम्मान है।"
जम्मू में पडगांवकर ने कहा कि वार्ताकार, नेताओं और जम्मू के लोगों को देख व सुन रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष शमशेर सिंह मन्हास ने संवाददाताओं को बताया कि पार्टी ने काफी सोच-विचार के बाद वार्ताकारों के बहिष्कार का निर्णय लिया है, क्योंकि उन्होंने कश्मीर मुद्दे में पाकिस्तान को पक्ष बनाए जाने की बात कही थी।
मन्हास ने कहा, "चूंकि कश्मीर हमारा अंदरूनी मामला है, ऐसे में भला पाकिस्तान इसमें पक्ष कैसे बन सकता है? ये टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं।"
ज्ञात हो कि पडगांवकर ने कश्मीर घाटी में अपने प्रवास के दौरान कहा था, "कश्मीर विवाद में पाकिस्तान एक पक्ष है।"
पडगांवकर ने जम्मू में कहा कि वार्ताकारों के दल ने घाटी में अलगाववादियों को छोड़कर बाकी हर किसी से मुलाकात की।
पडगांवकर और राधाकुमार कश्मीर की चार दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन जम्मू आए थे। कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने तीनों वार्ताकारों का बहिष्कार करने की अपील की थी। तीसरे वार्ताकार हैं एम. एम. अंसारी। वे कश्मीर से ही दिल्ली चले गए थे।
पडगांवकर ने कहा कि उन्हें पता था कि जो घाटी में स्वीकार्य है वह जम्मू में स्वीकार्य नहीं होगा।
पडगांवकर, कुमार और अंसारी ने घाटी में मुख्यत: प्रमुख पार्टियों के नेताओं जैसे नेशनल कांफ्रेंस के नेता और राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एम. एच. बेग से मुलाकात की। वे विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों से भी मिले।
दूसरी ओर श्रीनगर और घाटी के कुछ अन्य बड़े शहरों में बुधवार को अलगाववादियों के जुलूस को नाकाम करने के लिए लगाए गए कर्फ्यू के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए संघर्ष में तीन पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 15 लोग घायल हो गए।
एक पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा कस्बे में पथराव कर रहे प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाकर्मियों को गोलीबारी करनी पड़ी। परिणामस्वरूप चार व्यक्ति घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल हुए एक व्यक्ति को इलाज के लिए श्रीनगर ले जाया गया है।
श्रीनगर में भी शाम को संघर्ष हुआ। भीड़ ने पुराने शहर के नौहेट्टा, गोजीवाड़ा व राजौरी कडाल इलाके में तथा ऊपरी शहर के बाटमालू इलाके में वाहनों पर पथराव किया। दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग और बिजबेहरा कस्बों में भी संघर्ष हुआ, जहां आठ लोग घायल हो गए।
इसके पहले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "श्रीनगर, अवंतीपोरा, पाट्टन, पल्हालन, कुंजार, सोपोर, हंदवाड़ा, कुपवाड़ा और क्रालपोरा में ऐहतियात के तौर पर कर्फ्यू लगाया गया है।"
उन्होंने कहा कि श्रीनगर में स्कूल और दफ्तर जाने वालों को रोका नहीं जा रहा है। साथ ही मरीजों तथा अन्य जरूरी कार्यो के लिए लोगों को निकलने की अनुमति दी गई है।
अधिकारी ने बताया, "प्रशासन का इरादा कर्फ्यू लगाकर आम लोगों को असुविधा पहुंचाना नहीं है। इसका मकसद केवल काूनन एवं व्यवस्था भंग करने वाले शरारती तत्वों को रोकना है।"
हुर्रियत कांफ्रेस के दोनों धड़ों के दोनों नेताओं सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारुख ने 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना के कश्मीर में दाखिल होने के विरोध में श्रीनगर के सोनवार में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षक कार्यालय (यूएनएमओजी) तक जुलूस निकालने का आह्वान किया था।
घाटी के अन्य बड़े शहरों और श्रीनगर के अधिकतर इलाकों में बुधवार को दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सार्वजनिक परिवहन, बैंक और डाक घर बंद रहे।
सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन देखे गए। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान तैनात किए गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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