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अब पांचवीं कक्षा से ही बच्चों को तराशेगा सुपर-30

ब्रजेन्द्र नाथ सिंह

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिक संस्थानों (आईआईटी) में गरीब परिवारों के मेधावी छात्रों का दाखिला दिलाने के लिए उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षित करने वाली शैक्षणिक संस्था सुपर-30 अब एक ऐसा स्कूल आरंभ करने की योजना बना रही है, जिसमें पांचवीं कक्षा से ही बच्चों को आईआईटी के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।

दरअसल, सुपर-30 ने इसलिए यह कदम उठाने की सोची है, क्योंकि उसे गरीब परिवारों से प्रतिवर्ष 30 मेधावी छात्रों को चुनने में अब दिक्कतें आ रही हैं।

सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार कहते हैं कि गरीबी के कारण अधिकांश बच्चे निचली कक्षाओं में ही स्कूल छोड़ देते हैं। इसकी वजह से देश न जाने कितने प्रतिभाओं को खो देता उसकी कोई गिनती नहीं है।

आनंद ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, "आज हमें 30 बच्चों को खोजने में कठिनाई आ रही है। यदि हम पांचवीं कक्षा से ही बच्चों को प्रशिक्षित करने लगे तो हमारे पास प्रतिभावान छात्रों की कोई कमी नहीं रहेगी और उन्हें हम स्कूली जीवन से ही आईआईटी के लिए प्रशिक्षित कर सकेंगे।"

वह कहते हैं, "हमारी योजना 'स्कूल फॉर फ्यूचर प्लानिंग' खोलने की है, जिसमें गरीब परिवारों के मेधावी छात्रों की पहचान कर उन्हें पांचवीं कक्षा से ही आईआईटी के लिए तराश जा सके। इसके कई फायदे होंगे। एक तो उन छात्रों को प्लेटफार्म मिल जाएगा जो निचली कक्षाओं में ही स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं और दूसरा कि कुछ सालों बाद हमें मेधावी छात्रों को खोजने में कठिनाई नहीं होगी, क्योंकि जब बच्चों को पांचवीं कक्षा से ही प्रशिक्षित किया जाएगा तो वे निश्चित तौर पर आगे का अपना रास्ता आसान कर लेंगे।"

विभिन्न संगठनों से संस्था के नाम पर आर्थिक मदद लेने और फंड उगाहने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर वह कहते हैं, "अभी तक तो हमने अपने परिश्रम से इस संस्था को आगे बढ़ाया है। ऐसे में आरोप लगाने वालों के मुंह पर ताला नहीं लगाया जा सकता।"

यह पूछे जाने पर कि वे बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनके खाने-पीने व रहने तक का खर्च उठाते हैं और उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षित करते हैं और अब आप स्कूल खोलने की बात कर रहे हैं। ऐसे में इसके लिए पैसे कहां से आएंगे? आनंद कहते हैं, "निश्चित तौर पर पैसे की कमी आड़े आएगी लेकिन मैंने उसकी तैयारी कर ली है।"

वह कहते हैं, "मैंने ऑन लाइन पढ़ाने की तैयारी की है। कई विदेशी संस्थानों ने इस सिलसिले में संपर्क साधा है। हाल ही अबू धाबी के एक प्रौद्योगिकी संस्थान से उसके छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने का प्रस्ताव है, जिसे मैंने स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा मैं अपने अब तक के सफर के बारे में और आईआईटी तैयारियों के बारे में एक किताब लिखने जा रहा हूं। इसके लिए एक विदेशी प्रकाशक से बात भी हो चुकी है। इस तरीके से पैसे कमाए जाएंगे।"

यह पूछने पर कि क्या उन्होंने सरकार से कभी कोई मदद मांगी या उसकी तरफ से कोई पेशकश आई, आनंद कहते हैं, "सरकार से बस हम इतना चाहते हैं कि वह हमें सुरक्षा दे।"

बिहार के चुनावी मौसम के बारे में भी वह खुलकर बात करने से नहीं कतराते हैं। आनंद कहते हैं, "सरकार किसी की भी आए। विकास होना चाहिए। लोग विकास के नाम पर मतदान करें और जातिगत आधार पर मतदान करने से बचें।"

वह कहते हैं, "मैंने यह महसूस किया है कि जब से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने हैं तब से उन्होंने गुंडे माफियाओं पर लगाम कसी है। लोगों में सुरक्षा का माहौल बना है। पहले ऐसा नहीं था। खुद मैं कोचिंग माफियाओं का शिकार हुआ। मुझ पर हमले हुए, लेकिन अब ऐसा नहीं है।"

संस्था से निकले छात्रों का सुपर-30 से लगाव के बारे में पूछे जाने पर वह कहते हैं, "ज्यादातर बच्चों से जुड़ाव बना रहता है, लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो चकाचौंध में डूब जाते हैं। वैसे, मैं बच्चों से हमेशा कहता हूं कि वे कहीं भी रहें लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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