बिहार चुनाव : दागियों को टिकट देने में पीछे नहीं है कोई दल (लीड-1)
राज्य में तीन चरण के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और चौथे चरण के तहत 28 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव सुधारों की दिशा में काम कर रहे एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और नेशनल इलेक्शन वॉच की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन चार चरणों में कुल 1237 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें में 481 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। इनमें से 288 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पार्टी विद डिफरेंस होने का दावा करने वाली देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 47 ऐसे उम्मीदवारों को खड़ा किया है, जिन पर कई तरह के आपराधिक मामले दर्ज हैं। राज्य की एक अन्य प्रमुख दल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के 32 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले लंबित हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने में पीछे नहीं है। राजद के 122 में से 69 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन आपराधिक मामले चल रहे हैं। कांग्रेस भी दागियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को चुनावी दंगल में उतारने में अन्य दलों से पीछे नहीं है। कांग्रेस के 171 में से 64 उम्मीदवार आपराधि पृष्ठभूमि वाले हैं। जनता दल (यु) के 102 में से 54 और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 164 में से 62 उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं।
प्रमुख राजनीति दलों के ऐसे उम्मीदवार जिन पर हत्या, बलात्कार और चोरी जैसे संगीन मामले दर्ज हैं उनमें जद (यु) के 38, लोजपा के 19, भाजपा के 21, राजद के 39, बीएसपी के 43 और कांग्रेस के 33 उम्मीदवार हैं।
आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ चौथे चरण में कुल 91 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 49 उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जिनके खिलाफ हत्या और हत्या की साजिश रचने जैसे संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
चौथे चरण में राजद ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सर्वाधिक उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इसके बाद भाजपा, कांग्रेस, लोजपा, जनता दल (यु) और बसपा का स्थान है। राजद ने सर्वाधिक 62 फीसदी दागी उम्मीदवारों को तो भाजपा ने 53 फीसदी, कांग्रेस ने 41, लोजपा ने 40, जद (यु) ने 38 और बसपा ने 37 फीसदी ऐसे लोगों को उम्मीदवार बनाया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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