अब रिमोट सेन्सिंग से प्रोस्टेट कैंसर का इलाज

समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक इस तकनीक में केवल कैंसर कोशिकाओं को ही निशाना बनाया जाता है। इससे प्रोस्टेट कैंसर की तकलीफ झेल रहे हजारों पुरुषों को इलाज के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।

इस तकनीक से किए जाने वाले इलाज में चावल के दाने के आकार के तीन ट्रांसमीटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। इन ट्रांसमीटर्स को मरीज के कैंसर ट्यूमर में लगाया जाता है। इन ट्रांसमीटर्स से निरंतर निकलने वाले संकेतों को एक्स-रे उपकरण पर प्राप्त किया जा सकता है। ये ट्रांसमीटर्स रेडियोथैरेपी भी देते हैं।

वर्तमान में जिस तरह के रेडियोथैरेपी इलाज का इस्तेमाल किया जाता है उससे कैंसर कोशिकाओं के अतिरिक्त अन्य कोशिकाएं भी नष्ट हो जाती हैं जबकि नई तकनीक में केवल प्रोस्टेट ट्यूमर की कोशिकाओं को निशाना बनाया जाता है।

अब तक जिस रेडियोथैरेपी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था उसमें परेशानी यह थी कि इलाज के दौरान मरीज की स्थिति में थोड़ा सा भी परिवर्तन होता था तो शरीर के स्वस्थ ऊतकों में रेडियो किरणें पहुंचकर उन्हें भी नष्ट कर देती थीं।

कैलिप्सो सिस्टम नाम की नई युक्ति से किए जाने वाले इस नए इलाज में यदि कैंसर ट्यूमर की स्थिति में एक मिलीमीटर जितना भी परिवर्तन होता है तो ट्रांसमीटर्स से इसका पता चल जाता है और उनसे निकलने वाली रेडियोएक्टिव किरणें रुक जाती हैं। जब ट्यूमर दोबारा अपनी पूर्व स्थिति में आता है तो फिर से रेडियोएक्टिव तरंगें निकलने लगती हैं।

सिएटल की 'कैलिप्सो मेडीकल टैक्नोलॉजीज' कम्पनी ने इस तकनीक को विकसित किया है और उसका अनुमान है कि स्तन कैंसर के इलाज में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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