अमेरिका का कश्मीर पर मध्यस्थता से इंकार (राउंडअप)
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका ने भारत को भरोसा दिलाया है कि कश्मीर पर मध्यस्थता करने का उसका कोई इरादा नहीं है। इसके साथ ही अमेरिका ने उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात से प्रतिबंध हटाने और असैन्य परमाणु व्यापार सहित कई सारे मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति का संकेत दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का प्रस्तावित भारत दौरा उनके 20 महीने के कार्यकाल का न सिर्फ सबसे लंबा दौरा होगा, बल्कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, उर्जा एवं शिक्षा जैसे कई सारे क्षेत्रों में भारत के साथ भविष्य के सम्बंधों को एक निश्चित दिशा भी देगा।
ओबामा अपने चार दिवसीय दौरे की शुरुआत छह नवम्बर की शाम मुम्बई से करेंगे और आठ नवम्बर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ नई दिल्ली में बातचीत करेंगे।
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि ओबामा का दौरा भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी के वैश्विक प्रकृति को रेखांकित करेगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इन मुद्दों में अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र के हालात, वैश्विक आतंकवाद, चीन और एशियाई सुरक्षा ढांचा शामिल होगा।
अधिकारी ने आगे कहा, "आज जो चिंताएं अमेरिका की हैं, वही चिंताएं भारत की हैं। और जो चिंताएं भारत की हैं, वही चिंताएं अमेरिका की हैं। यदि हम इन मुद्दों पर आगे बढ़ते हैं, तो यह आगे बढ़ने की एक बड़ी पहल होगी। ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हम एक-दूसरे से सीखना और आपस में बांटना चाहेंगे।"
पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे के अंतर्राष्ट्रीयकरण की कोशिश को लेकर भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए अमेरिका ने साफ किया कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसे नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच सुलझाया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि कश्मीर पर अमेरिका का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। कश्मीर विवाद भारत व पाकिस्तान के बीच बातचीत का हिस्सा है, और इसमें अमेरिका या अन्य किसी देश की कोई भूमिका नहीं है।
अमेरिका का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब ओबामा के दौरे के दौरान कश्मीर में आतंकी हमले का खतरा होने की खबर आई है और यह भी कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे के अंतर्राष्ट्रीयकरण करने का प्रयास तेज कर दिया है।
भारतीय सुरक्षा बलों को ओबामा के दौरे के दौरान कश्मीर में आतंकवाद में बढ़ोतरी की आशंका है।
अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन पाकिस्तान को अमेरिकी सहायता को लेकर भारत की चिंताओं से वाकिफ है। लेकिन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन पाकिस्तान से लगातार कह रहा है कि वह आतंकवाद से मुकाबले के लिए और बहुत कुछ करे।
अधिकारी से जब पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी सहायता के दुरुपयोग सम्बंधी भारत की चिंताओं के बारे में पूछा गया तो उसने कहा, "हम पाकिस्तान से लगातार बातचीत कर रहे हैं और उससे और बहुत कुछ करने के लिए कह रहे हैं।"
ओबामा के भारत दौरे के दौरान भारत को उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने और संयुक्त राष्ट्र में भारत की एक बड़ी वैश्विक भूमिका के लिए अमेरिकी समर्थन को रेखांकित किया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका भारत की एक बड़ी भूमिका का हमेशा से समर्थक रहा है और वह मानता है कि भारत को 21वीं सदी की वास्तविकताओं को जाहिर करने के लिए किसी भी अंतर्राष्ट्रीय ढांचे में केंद्रीय भूमिका निभानी चाहिए।
अधिकारियों ने भारत से मिल रहे उन संकेतों का स्वागत किया, जिसमें उसने कन्वेंशन ऑन सप्लीमेंट्री कम्पेनसेशन (सीएससी) पर हस्ताक्षर करने की इच्छा जताई है। यह वैश्विक संधि परमाणु दुर्घटना की स्थिति में भारत को वैश्विक कोष तक पहुंच सुलभ कराएगी। अधिकारी ने कहा कि यह संधि भारत के साथ परमाणु व्यापार करने के लिए अमेरिकी कम्पनियों हेतु रास्ता साफ करेगी।
इसके पहले अधिकारी ने पिछले नवम्बर में हुए मनमोहन सिंह के सरकारी दौरे का जिक्र करते हुए कहा, "जब से राष्ट्रपति ओबामा आपके प्रधानमंत्री के साथ वाशिंगटन में मिले हैं, तभी से हमारे बीच कुछ अच्छी बातें चल निकली हैं।"
अधिकारी ने कहा, "एक वर्ष बाद भी हम उस बारे में सिर्फ बातचीत ही नहीं करते रहना चाहते, बल्कि स्पष्ट रूप में यह प्रदर्शित करना चाहते हैं कि साझेदारी किस तरह महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ेगी।"
अधिकारी के अनुसार अमेरिका ने भारत के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार के इस वर्ष 50 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है और आगले कुछ वर्षो में इसमें गुणात्मक वृद्धि की उसे उम्मीद है।
अधिकारी ने कहा, "वर्ष 2004 और 2008 के बीच हमारे बीच दोतरफा व्यापार दोगुना होकर 43 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। वर्ष 2009 में इसमें थोड़ी गिरावट आई। लेकिन आगे का भविष्य उत्साहवर्धक है।"
अधिकारी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि रक्षा, जलवायु परिवर्तन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ उर्जा, व्यापार, बाजार उपलब्धता और उच्च प्रौद्योगिकी का निर्यात जैसे मुद्दे ओबामा के एजेंडे में शीर्ष पर होंगे।
अधिकारी ने कहा, "जी हां, कई सारे मुद्दे होंगे, जिन पर हम बातचीत करेंगे- बाजार उपलब्धता के बारे में बातचीत स्वाभाविक ही है। लेकिन हमारे बीच दाता और दान लेने वाले का रिश्ता अब लंबे समय तक नहीं रहने वाला है।"
पिछले वर्ष जनवरी में उनके राष्ट्रपति बनने के बाद किसी देश की उनकी यह सबसे लम्बी आधिकारिक यात्रा होगी।
ओबाम अपनी पत्नी मिशेल ओबामा के साथ मुम्बई से अपने भारत दौरे की शुरुआत करेंगे और नई दिल्ली से इंडोनेशिया के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। नई दिल्ली में वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बातचीत करेंगे।
भारतीय उद्योग जगत ओबामा के दौरे का इंतजार कर रहा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और इंडियन चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) जैसे दो प्रमुख औद्योगिक संस्थाओं ने उम्मीद जाहिर की है कि यह दौरा दोनों देशों के आर्थिक सम्बंधों की सच्ची संभावना को साकार करने में मददगार साबित होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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