जापान के साथ परमाणु समझौते पर असमंजस (लीड-1)
मीनू जैन
टोक्यो, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ताजा बयान से जापान के साथ प्रस्तावित असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत परमाणु मसले पर जापान की संवेदनशीलता को समझता है।
जापान दौरे पर पहुंचे सिंह ने कहा, "मैं जापान में परमाणु मुद्दे की संवेदनशीलता को समझता हूं इसीलिए हम समझौते को लेकर उस पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाएंगे।"
प्रधानमंत्री ने यह बात एक स्थानीय कारोबारी संस्था 'निप्पन केडनरेन', 'जापान चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' एवं 'भारत-जापान व्यापार सहयोग समिति ' की ओर से आयोजित एक भोज में कही।
सिंह का यह बयान जापानी प्रधानमंत्री नाओतो कान से उनकी मुलाकात के ठीक पहले आया है। दोनों नेता शाम के समय मुलाकात करेंगे।
सिंह रविवार को जापान पहुंचे। वह टोक्यो में तीन दिनों तक रहेंगे और जापान के साथ वार्षिक बैठक में शिरकत करेंगे। इसके बाद वह मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के लिए रवाना होंगे। यात्रा के आखिरी पड़ाव में वह वियतनाम जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि जापान दुनिया का एकमात्र देश है जिसने परमाणु हथियारों की त्रासदी झेली। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी ने उसके दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे।
भारत और जापान पहले से परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने प्रधानमंत्री के इस बयान से पहले कहा, "परमाणु ऊर्जा के मसले पर दोनों देशों में दो दौर की बात हो चुकी है। दोनों इस बातचीत को आगे ले जाने पर सहमत हैं। "
टोक्यो रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में कहा था, "हम जापान के साथ परमाणु ऊर्जा पर समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं। मुझे इसका भरोसा है कि हम इस समझौते का मूर्त रूप दे सकेंगे जो दोनों के हित में होगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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