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बाघिन टी-17 का नाम 'कृष्णा' रखा गया

गहलोत आज सुबह अचानक रणथम्भौर पहुंचे। उन्होंने हाल ही में वहां मारे गए तीन बाघों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने रणथम्भौर पहुंच कर वहां हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को बाघों व अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने परियोजना क्षेत्र का दौरा कर अधिकारियों को बाघ संरक्षण के लिए 87 किलोमीटर लम्बी चारदिवारी के निर्माण का कार्य समयबद्घ रूप में पूरा करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने जोगी महल में वन विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तार से बाघ संरक्षण परियोजना के संबंध में विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर वन राज्य मंत्री रामलाल जाट के अलावा विभाग के प्रमुख शासन सचिव वी.एस. सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर.एन. मल्होत्रा सहित अधिकारियों का दल भी उपस्थित था।

मुख्यमंत्री रणथम्भौर अभयारण्य का भ्रमण करने के लिये जब निकले, तो मलिक तालाब के पास उन्हें बाघिन टी-17 दिखाई दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस बाघिन का नाम कृष्णा रखने के निर्देश दिया। हाल ही हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली एथलीट कृष्णा पूनिया के नाम पर इस बाघिन को यह नाम दिया गया है।

पिछले दिनों बाघों के मारे जाने और उनके इधर-उधर निकल जाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने वन्य अधिकारियों से कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए बाघों का सरंक्षण जहां महत्वपूर्ण है, वहीं क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि बाघ प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण के लिए पक्की चारदिवारी का निर्माण नरेगा के तहत समयबद्घ रूप में पूरा किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बाघों के पलायन की समस्या पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की और कहा कि बाघ परियोजना क्षेत्र से गांवों को विस्थापित करने के पक्ष में माहौल है।

उन्होंने कहा कि गांव वालों को स्थानांतरित करने के लिए पहले प्रति यूनिट एक लाख रुपये दिये जा रहे थे, जिसे बढ़ा कर दस लाख रुपये किया गया है। इसके अलावा हमें बाहर बसे गांवों को सुविधाए देनी चाहिए ताकि गांव के लोग अवैध चराई और लकड़ी के लिए पेड़ काटने हेतु बाघ परियोजना क्षेत्र में न जाएं।

पेड़ों को काटने से बचाने के लिए राज्य सरकार 50 प्रतिशत की दर पर अब तक छह हजार एलपीजी कनेक्शन गांव वालों को दे चुकी है और चारा उगाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर बिजली के कनेक्शन भी दिए जा रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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