बहुराष्ट्रीय कम्पनियां कृषि पर शिकंजा कसने की कोशिश में

नगोया (जापान), 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। एक अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था ईटीसी समूह ने आरोप लगाया कि बहुराष्ट्रीय बीज और एग्रोकेमिकल कम्पनियां गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में फसल पैदा करने का दावा कर सैकड़ों की संख्या में पेटेंट दाखिल कर रही हैं, ताकि दुनिया की खेती पर वह अपना शिकंजा स्थापित कर सकें।

18 - 29 अक्टूबर तक जैव विविधता विषय पर चल रहे संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में इस विषय पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए समूह ने कहा कि कुछ मुट्ठी भर बहुराष्ट्रीय कम्पनियां सरकारों पर कुछ ऐसे पेटेंटों को अनुमति देने का दबाव बना रही हैं, जो इतिहास का सबसे खतरनाक पेटेंट साबित हो सकता है।

भारतीय संगठन रिसर्च फाउंडेशन फॉर साइंस, टेक्न ोलॉजी एंड इकोलॉजी की वंदना शिवा ने कहा कि ये पेटेंट जैविक क्षेत्र में चोरी के ताजा तरीन उदाहरण हैं। किसानों ने हजारों सालों की कोशिश में प्रतिकूल परिस्थितियों में उपजाए जा सकने वाले बीजों का विकास किया है। जलवायु की समस्या का समाधान किसानों के द्वारा की जाने वाली खोजों, जैव विविधता और कृषि-पारिस्थितिकीय प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है, जो किसान समुदाय के ही हाथ में है।

ईटीसी समूह की सिल्विया रिबेरो ने कहा कि जीन पर काम करने वाली कुछ कम्पनियां ऐसे पेटेंट आवेदनों का ढेर लगा रही हैं, जो हमारी खाद्य आपूर्ति के लिए खतरा बन सकता है। कुछ मामलों में तो सिर्फ एक पेटेंट या आवेदन ही इंजीनियर्ड जीन सिक्वेंस पर ऐसे मालिकाना हक की बात करता है, जिसे सभी दूसरे फसलों पर लागू किया जा सकता है। यही नहीं उनसे बनने वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदाथोर्ं पर भी इसे लागू किया जा सकता है।

ईटीसी समूह ने दुनियाभर में 262 पटेंट परिवारोंे में ऐसे 1,663 पेटेंटों की पहचान की है। इन पेटेंटों का 77 फीसदी हिस्सा डुपोंट, मोंसांटो, बीएएसएफ, बेयर, सिंजेंटा और उनकी जैव सहयोगियों का है। दो-तिहाई हिस्सा तो सिर्फ तीन कम्पनियों डुपॉण्ट, बीएएसएफ और मोसांटो का है, जबकि सरकारी रिसर्च कंपनियों का हिस्सा सिर्फ 10 फीसदी है।

रिबेरो ने कहा कि अपने जीन संवर्धित फसलों की स्वीकृति के लिए इन कंपनियों ने अफ्रीका के कुछ किसानों को अपनी कुछ फसल दान में दी है। लेकिन इसके बदले वे चाहते हैं कि दूसरे विकासशील देशों में उनकी फसलों को प्रवेश मिल जाए। लेकिन ऐसे फसलों की स्वीकार नहीं किया जा सकता है, जिन्हें तकनीक रूप से अभी तक जांचा तक नहीं गया है।

ईटीसी समूह के नैथ डैनो ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की इस जैव विविधता सम्मेलन को ऐसी कोशिशों पर लगाम लगाना चाहिए और दुनिया भर में अपनी शाखाओं को इन पेटेंटों को खारिज करने के लिए कहना चहिए। सीबीडी और खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) को मिलकर सभी बौद्धिक संपदा दावों की आधारभूत जांच करनी चाहिए। ये पेटेंट एफएओ बीज समझौता का भी उल्लंघन करते हैं। इसकी प्रशासनिक इकाई को इनके खिलाफ जांच कर इन पर कार्रवाई करना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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