चीन यात्रा से माओवादी सेना नए विवाद में फंसे
काठमांडू, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। नेपाल की विपक्षी माओवादी पार्टी के प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड रविवार को भारत को चिढ़ाने के मकसद से बीजिंग यात्रा पर चले गए, लेकिन उनकी गुरिल्ला सेना इस महीने के शुरू में की गई चीन की अनधिकृत यात्रा को लेकर नए विवाद में फंस गई है।
नेपाल के एक दैनिक अखबार ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बारे में एक खबर प्रकाशित की है कि इसके करीब दर्जन भर प्रमुख कमांडर और तीन सांसद नौ दिनों की चीन यात्रा पर गए थे, जिसके बारे में उन्होंने नेपाल के किसी भी अधिकारी को सूचना नहीं दी थी।
करीब 19,500 लड़ाकू सदस्यों वाले पीएलए ने वचन दिया है कि जब तक सभी लड़ाकों को पुनस्र्थापित नहीं कर दिया जाता, वे छावनी में ही रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र का एक मिशन इस छावनी की निगरानी कर रहा है। लेकिन अब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक समिति आने वाले समय में इस छावनी की जिम्मेदारी ले लेगी।
लेकिन माओवादी कमांडरों ने अपनी इस चीन यात्रा की खबर न तो संयुक्त राष्ट्र मिशन को दी, न ही सरकार को दी।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने कहा है कि नियम तोड़ने वाले कमांडरों पर कार्रवाई की जाएगी।
कमांडरों की इस चीन यात्रा के दौरान उनके साथ नेपाल के पूर्व माओवादी, शांति और पुनर्निर्माण मंत्री जनार्दन शर्मा, पीएलए के पूर्व उप प्रमुख और सांसद बर्षा मान पुन अनंत और उनकी पत्नी ओंसारी घारती मागर भी थीं।
उधर जहां एक ओर पीएलए ने इस खबर को प्रसारित करने वाले अखबार दैनिक 'नागरिक' से कहा कि यह यात्रा एक निजी यात्रा थी, वहीं वरिष्ठ माओवादी नेताओं ने विरोधाभासी बयान देते हुए कहा है कि उन्हें एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।
माना जा रहा है कि माओवादियों के द्वारा लगातार की जा रही चीन यात्रा का मकसद भारत को चिढ़ाना रहा है।
कम्युनिस्ट नेता और सांसद नारायण मन बिजुक्षे ने शनिवार को कहा कि माओवादियों के प्रमुख प्रचंड की पिछले दो साल में की गई इस पांचवीं चीन यात्रा का मकसद चीन से नजदीकी दिखाकर भारत को चिढ़ाना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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