आपत्ति के बावजूद पडगाँवकर अटल

भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर पर बने मध्यस्थ दल के प्रमुख दिलीप पडगाँवकर के एक बयान के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से स्पष्टीकरण माँगा है.
दिलीप पडगाँवकर ने कहा है कि कश्मीर संकट का स्थायी हल पाकिस्तान को साथ लिए बिना नहीं निकल सकता.
भाजपा ने उनके इस बयान पर आपत्ति जताई है लेकिन पडगाँवकर ने कहा है कि पाकिस्तान का नाम लेकर वे एक तथ्य को रेखांकित कर रहे थे.
पडगाँवकर की अगुआई वाला तीन सदस्यों वाला मध्यस्थ दल कश्मीर घाटी के चार दिन के दौरे पर है.
इस बीच अलगाववादी गुट हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने मध्यस्थ दल से मिलने से ये कहते हुए इनकार कर दिया है कि इससे कोई लाभ नहीं होगा.
दूसरे अलगाववादी नेताओं ने भी मध्यस्थों के साथ मुलाक़ात की संभावना से इनकार किया है.
आपत्ति और स्पष्टीकरण
दिलीप पडगाँवकर ने श्रीनगर पहुँचने के बाद पत्रकारों के साथ एक बातचीत में पाकिस्तान को साथ लेने की बात की थी.
उनके इस बयान पर भाजपा ने सख़्त आपत्ति करते हुए प्रधानमंत्री से इस संबंध में सफ़ाई देने के लिए कहा है.
पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने कहा,"इस दल से हमें उम्मीद ये थी कि वे वहाँ के लोगों से बातचीत कर सरकार को आकर बताएँगे जिसके बाद बात आगे बढ़ेगी, मगर उसमें पाकिस्तान का नाम कैसे आया, ये स्पष्ट होना चाहिए."
उन्होंने माँग की कि प्रधानमंत्री कार्यालय को ये स्पष्ट करना चाहिए कि मध्यस्थ दल को किस निर्देश के साथ घाटी भेजा गया है और क्या पाकिस्तान के बारे मे मध्यस्थों की ओर से आया बयान प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति से दिया गया है.
इस संबंध में दिलीप पडगाँवकर ने बीबीसी से स्पष्ट किया कि केंद्र ने मध्यस्थ दल की नियुक्ति के दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि इस दल को घाटी जाकर अलग-अलग वर्गों और समुदायों से मिलकर उनका मत जानने की कोशिश करनी है.
पाकिस्तान के संबंध में अपने बयान का ज़िक्र करते हुए पडगाँवकर ने कहा,"पाकिस्तान का संबंध जम्मू-कश्मीर से 1947 से ही रहा है, और अगर लोग समझते हैं कि बिना पाकिस्तान के साथ बातचीत किए स्थिति को सुधारा जा सकता है, तो ये सही नहीं होगा, वे लिप्त हैं और शांति प्रक्रिया के लिए उनसे बातचीत आवश्यक है."
मध्यस्थ दल के अन्य सदस्य हैं प्रोफ़ेसर राधा कुमार और सूचना आयुक्त एमएम अंसारी.


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