कराची: सब कुछ सामान्य है

कराची में भी ऐसा ही होता है. किसी भी शाम ख़ौफ़ के बादल छाने लगते हैं. शहर के विभिन्न इलाक़ों से गोलीबारी की आवाज़ें आने लगती हैं जैसे बिजली कड़क रही हो. फिर ख़ून की इक्का दुक्का बूंदें गिरनी शुरु हो जाती हैं.
इसके बाद मूसलाधार ख़ून और शव ऐसे गिरते हैं जैसे ओले पड़ रहे हों. दरवाज़े बंद हो जाते हैं. शटर गिर जाते हैं और फिर नाइन ज़ीरो, मरदान हाऊस और चीफ़ मिनिस्टर हाऊस स्थित राजनीतिक मौसम के विभागों से घोषणा होती है कि बादल छट गए हैं. अब आप अपने अपने कामों पर आ जा सकते हैं.
1985 से अब तक यही हो रहा है. बस अगर कुछ अच्छा हुआ है तो यह कि वारदातों का अंदाज़ आधुनिक हो गया है. शुरु शुरु हाथ कच्चे थे तो अनाड़ीपन भी साफ़ दिखता था. आम लोग शिया सुन्नी, मुहाजिर, पठान और सिंधी के नाम पर आसानी से भड़क जाते थे. एक दूसरे को मारना शुरु करते तो मारते चले जाते.
समय के साथ साथ योजना भी साइंटिफ़िक होती चली गई और हाथ और निशाना भी पहले से ज़्यादा साफ और पक्का हो गया. अब स्थिति बेहतर है. अब अंधाधुंध हत्याएँ नहीं होतीं. उसे ही मारा जाता है जिसे मारना लिखा हुआ है. हत्याएं सीज़नल और सीरियल हो गई हैं. अगले दो महीने केवल डॉक्टरों का शिकार होगा. उसके बाद एक दूसरे के कार्यकर्ताओं को लिटाने का मौसम शुरु होगा.
फिर बंदूकों पर कपड़ा चढ़ा दिया जाएगा उसके बाद कुछ हाई प्रोफ़ाइल लोगों की ट्रॉफी हन्टिंग होगी. फिर अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने की सिरीज़ चलेगी केवल दुकानें, बसें और वैगनें जलेंगी. कुछ इलाक़ों की नाकाबंदी होगी. केवल आम लोगों को निशाना बनाया जाएगा. केवल सभाओं में एक दूसरे को गालियाँ दी जाएंगी, कोई हत्यारों का नाम नहीं लेगा.
बस अज्ञात हमलावरों पर आरोप लगा दिया जाएगा. फिर गिनती शुरु होती है. इस साल आपने अपनी आबादी और प्रभाव के हिसाब से तीन सौ मार दिए. और आप ने एक सौ तीस गिरा दिए. अब बस, आओ हम सब मिल कर कुछ सरकारी काम भी कर लें आख़िर लोकतंत्र को भी तो चलाना है.
यह वह दृश्य है जो अब हर कराची वाले के जीवन का एक हिस्सा है. अब सब को पता चल जाता है कि कार्यकर्ता की मौत हो गई है तो दो दिन जीवन अस्त-व्यस्त रहेगा. नेता की हत्या हुई है तो सप्ताह भर छुट्टी रहेगी. संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने का सिलसिला चला है तो बारह पंद्रह दिन कारोबार ठप्प रहेगा.
जब सब को अपना अपना हिस्सा पहुँच जाएगा. जब सब एक दूसरे के प्रभाव को फिर से मान लेंगे. जब एक दूसरे की सीमा में ज़मीनों पर क़ब्ज़े की कोशिश रुक जाएगी तो शहर भी सामान्य हो जाएगा. सरकार और ख़ुफ़िया एजेंसियां केवल इस पर नज़र रख रही हैं कि कोई किसी का अधिकार न छीन ले.
शब्दकोश में शांति का न जाने क्या अर्थ है लेकिन कराची में एक शव से दूसरे शव गिरने के बीच का अंतराल शांति कहलाता है. अब यह जब तक रहे.












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