कश्मीर में ताजा हिंसा में 11 पुलिसकर्मियों सहित 25 घायल (लीड-2)
उत्तरी कश्मीर के बारामूला, सोपियां और दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग कस्बे में तथा श्रीनगर के नवाबाजार में झड़प की सूचना हैं। इन इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू का उल्लंघन किया और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया।
श्रीनगर में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "श्रीनगर और शहर के अन्य इलाकों गांदेरबल, बारामूला, सोपोर, हंदवाड़ा, कुपवाड़ा, पट्टान, पलहलान, दिलेना और कुछ अन्य कस्बों में भी ऐहतियात के तौर पर कर्फ्यू लगाया गया है।"
पुलिस अधिकारी ने बताया कि उग्र युवकों ने मंगलवार की शाम बारामूला कस्बे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के काफिले पर भारी पथराव किया।
प्रदर्शनकारियों ने भारत के खिलाफ और आजादी के समर्थन में नारेबाजी की, कर्फ्यू का उल्लंघन किया और वाहन के काफिले पर पथराव किया। मजबूरन सुरक्षाकर्मियों को गोलीबारी करनी पड़ी।
इस संघर्ष में सात प्रदर्शनकारी घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल दो व्यक्तियों मोहम्मद यूसुफ चन्ना और रऊफ अहमद भट को विशेष इलाज के लिए श्रीनगर भेज दिया।
बाद में पथराव तेज हो गया और इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण के लिए अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया।
पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि तीन वरिष्ठ अधिकारियों सहित 11 पुलिसकर्मी पथराव में घायल हो गए हैं।
अपराह्न् में सोपियां कस्बे में भी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच संघर्ष हुआ। यहां सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई गोलीबारी में तीन व्यक्ति घायल हो गए। इसके अलावा चार अन्य भी संघर्ष में घायल हुए।
सूत्रों के मुताबिक आलम पिछले छह महीनों के दौरान आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शनों और रैलियों में भाग ले चुका है। कश्मीर घाटी में जारी हिंसा में अभी तक 100 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं।
आलम को जून में जेल से रिहा किया गया था लेकिन उसके तुरंत बाद से ही वह भूमिगत हो गया था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "आलम को श्रीनगर जिले के वागंड इलाके में स्थित उसके चाचा के घर से गिरफ्तार किया गया।"
आलम की गिरफ्तारी के बाद गिलानी ने कहा, "मुझे इस बात से दुख पहुंचा है कि आलम को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन गिरफ्तारी और हिरासत का असर हमारे आंदोलन पर नहीं पड़ेगा।"
प्रशासन द्वारा कर्फ्यू लगाए जाने की वजह से दुकानें, शैक्षणिक संस्थान और औद्योगिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रहे और सड़कों पर निजी और सरकारी बसों की आवाजाही नहीं हुई।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमारा उद्देश्य है कि घाटी में जनजीवन सामान्य बना रहे और आम नागरिकों को बिना पहचान पत्र के इधर-उधर आने की इजाजत नहीं दी जाएगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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