सूबे में उठी केंद्रीश् पुर्नवास नीति को लागू करने की मांग

नदी बचाओ आंदोलन के सूत्रधार सुरेशभाई ने जनपक्षीय पुर्नवास नीति की वकालत करते हुए राज्य सरकार से कहा है कि उसे केन्द्र सरकार की पुर्नवास नीति 2007 का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नदियों पर बांध बनाने और प्राकृतिक आपदाओं के कारण हजारों लोगों का घरबार चौपट हो गया है। राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं को अधुरा बताते हुए उन्होंने मांग की है कि प्रभावितों को घर के बदले घर और खेत के खेत मिलना चाहिए।

सुरेश भाई ने मांग की है कि सूबे में जल्द से जल्द एक कारगर पुर्नवास नीति लागू होनी चाहिए।

गौरतलब हो कि सूबे में पुर्नवास की नीति में सुधार की बात स्वयं मुख्यमंत्री निशंक भी स्वीकारते रहे हैं। किन्तु राज्य की अधिकांश भूमि पर वन होने के कारण पुर्नवास में सबसे बड़ा रोड़ा वन अधिनियम है जिसमें संसोधन की मांग स्वयं मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार से यह कहते हुए की है कि आपदा के मद्देनजर कई गांवों को तुरन्त पुनर्वासित करने की जरूरत है इसलिए केन्द्र वन अधिनियम में संसोधन की छूट दे। सनद रहे की सूबे के कुल क्षेत्रफल 53483 वर्ग किलोमीटर में 35651 वर्ग किलोमीटर पर वन क्षेत्र है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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