गहलोत सरकार के दो मंत्री आमने-सामने
भरत सिंह ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री हैं जबकि धारीवाल शहरी विकास मंत्री हैं। सिंह ने आईएएनएस से कहा, "मुख्यमंत्री हमारी पार्टी के नेता हैं। इसलिए मैंने अपनी शिकायतें उनके समक्ष रखी हैं। अब क्या कदम उठाना है, यह उन पर ही निर्भर करता है।"
धारीवाल और सिंह के बीच ताजा विवाद कोटा में बुधवार को होने वाले मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर उठा है। कोटा में गहलोत पांच सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। इन सभी कार्यक्रमों में भरत सिंह को आमंत्रित नहीं किया गया है और न ही इसके लिए वितरित निमंत्रण पत्रों में सिंह का नाम छापा गया है। दूसरी ओर प्रत्येक कार्यक्रमों में शहरी विकास मंत्री शांतिधारीवाल का नाम शामिल कि या गया है।
सिंह कोटा जिले के ही सांगोद से विधायक हैं और हाड़ौती अंचल में कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं। वे पूर्व में सांसद भी रह चुके हैं। दूसरी ओर शहरी विकास मंत्री शांतिधारीवाल कोटा शहर से विधायक चुने जाते हैं। कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बांरा जिले को शामिल कर बने हाड़ौती अंचल में अपने अपने राजनीतिक वर्चस्व को लेकर ही दोनों नेताओं में लड़ाई है।
कोटा में आयोजित किए जा रहे सभी पांच कार्यक्रमों में जिला प्रशासन और समबंधित विभागों ने अपने निमंत्रण पत्रों में शांतिधारीवाल के साथ ही कोटा शहर से ही भाजपा के दो स्थानीय विधायकों को भी आमंत्रित किया है लेकिन वरिष्ठ मंत्री होने के बावजूद भरत सिंह का नाम शामिल नहीं किया गया है। इससे सिंह नाराज हैं। दूसरी ओर धारीवाल की ओर से इस ताजा विवाद पर फिलहाल कुछ नहीं कहा गया है।
सिंह ने कहा कि उन्हें इससे पीड़ा पहुंची है। कहा जा रहा है कि सिंह दिल्ली में पार्टी के कुछ नेताओं के सम्पर्क में हैं और अपनी शिकायत लेकर दिल्ली भी पहुंच सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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