सर्वोच्च न्यायालय ने स्टरलाइट मामले पर रोक की अवधि बढ़ाई (लीड-1)

अदालत ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के तांबा स्मेल्टर संयंत्र को अपनी गतिविधि जारी रखने की अनुमति दे दी और साथ ही केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में होने वाली मामले की अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने पहली अक्टूबर के अपने पूर्व के आदेश में मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने 1996 में दायर एक जनहित याचिका पर संयंत्र को बंद करने का आदेश दे दिया था।

अदालत ने केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आर.वी.रवींद्रन और न्यायमूर्ति एच.एल.गोखले की पीठ ने सोमवार को कहा, "आप किसी चालू कम्पनी को इस तरह से बंद नहीं कर सकते।"

अदालत ने कहा, "आपने (उच्च न्यायालय) 1990 के दशक के अंतिम समय में दायर एक पर्यावरण सम्बंधी आपत्ति को अचानक संज्ञान में लिया और एक चालू संयंत्र को बंद करने का आदेश दे दिया।"

अदालत ने स्टरलाइट इंडस्ट्री को भी इस बात का हलफनामा दाखिल करने को कहा कि उसने तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) द्वारा कम्पनी के खिलाफ पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर खड़ी की गई आपत्तियों के लिहाज से उसने क्या कदम उठाए।

ज्ञात हो कि स्टरलाइट इंडस्ट्रीज लंदन में रह रहे भारतीय उद्योगपति अनिल अग्रवाल के वेदांता रिसोर्सिज का हिस्सा है।

तूतीकोरिन संयंत्र के विस्तार पर अग्रवाल की यह कम्पनी लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। पिछले साल स्टरलाइट इंडस्ट्रीज ने इस संयंत्र की क्षमता को दोगुना करने की ऐलान किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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