प्रधानमंत्री की बात का मान रखा जाना चाहिए : गिलानी
वह सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश का हवाला दे रहे थे जिसमें सरकार से इस बात का लिखित आश्वासन मांगा गया था कि वह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की बहाली संबंधी कार्यकारी आदेश वापस नहीं लेगी।
गिलानी ने रविवार रात टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा, "जब कोई प्रधानमंत्री कुछ कहता है, चाहे लिखित में कहे या मौखिक तौर पर, तो हर किसी को उस बात का मान रखना चाहिए।"
समाचार पत्र 'डान' ने सोमवार को खबर दी है कि गिलानी मीडिया में आई उन रिपोर्टों की प्रतिक्रिया में गुरुवार की रात दिए अपने मौखिक आश्वासन का जिक्र कर रहे थे, जिनमें कहा गया था कि सरकार न्यायपालिका को आपातकाल पूर्व का दर्जा बहाल करने के अपने कार्यकारी आदेश को वापस लेने की योजना बना रही है।
कुछ समाचार चैनलों ने खबर चलाई कि सरकार अपनी उस अधिसूचना को वापस लेने की योजना बना रही है, जिसके जरिए पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा तीन नवम्बर, 2007 के आपातकालीन आदेश के तहत हटाए गए उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को उनके दो नवम्बर, 2007 के दर्जे को बहाल किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications