काचरू मामला : अदालत ने गुमनाम पत्र को नजरअंदाज किया

बचाव और अभियोजन पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक न्यायालय के न्यायाधीश पुरिंदर वैद्य ने पत्र के आधार पर चलने वाली कार्यवाही को त्यागने का निर्देश दिया। अब इस मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को की जाएगी।

टांडा के राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र अमन काचरू (19) की आठ मार्च 2009 को अंतिम वर्ष के चार छात्रों द्वारा कथित रूप से रैगिग किए जाने के कुछ घंटों बाद मौत हो गई थी।

न्यायाधीश वैद्य ने गत 30 सितम्बर को दोनों पक्षों से गुमनाम पत्र के बारे में जवाब मांगा था। पत्र में दिल्ली की रहने वाली लड़की को भी न्यायालय में सुनवाई के दौरान बुलाए जाने की बात कही गई थी। पत्र के अनुसार उसकी मौजूदगी इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

पत्र में दावा किया गया है कि इसे लिखने वाले के पास कुछ और मोबाइल फोन के विवरण हैं और वह राज्य पुलिस के साथ सहयोग कर रहा है।

अभियोजन पक्ष के वकील जीवन लाल शर्मा ने न्यायालय को बताया कि पुलिस ने पत्र की मौलिकता के बारे में जांच करने की कोशिश की है, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली। पत्र में दिए गए संदर्भ तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

उधर, अमन के पिता पहले ही पत्र की बातों को नकार चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने गत दो अगस्त से इस मामले की सुनवाई दोबारा शुरू की है। सुनवाई शुरू होने पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मेडिकल के चार आरोपी छात्रों अजय वर्मा, नवीन वर्मा, अभिनव वर्मा और मुकुल शर्मा की जमानत रद्द कर दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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