जेपीसी करे राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार की जांच : गडकरी (लीड-1)
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए एक सयुंक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग भी की है।
दिल्ली में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में गडकरी ने कहा, "राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तय बजट को कई बार बढ़ाया गया और हर बार केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनुमोदन से ऐसा हुआ। आयोजन समिति को जो राशि आवंटित की गई, उसकी स्वीकृति सीधे पीएमओ द्वारा दी गई। मेरा सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि के आवंटन को स्वीकृति देते समय कोई जांच-पड़ताल क्यों नहीं की गई?"
गडकरी ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीएमओ के अलावा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली में शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली सरकार को आड़े-हाथों लिया। उन्होंने कहा, "खेलों से जुड़ी तैयारियों के लिए राशि का आवंटन शहरी विकास मंत्रालय के जरिए हुआ। ऐसे में यह मंत्रालय भी भ्रष्टाचार के घेरे में आता है। दिल्ली की शीला सरकार ने भी खेलों के नाम हजारों करोड़ रुपये खर्च किए। यहां तक दलित कल्याण कोष की राशि भी खेलों के नाम पर खर्च कर दी गई। मेरा सवाल यह है कि ऐसा क्यों किया गया।"
भाजपा अध्यक्ष ने खेलों के लिए बने स्टेडियमों पर आए खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "स्टेडियमों को नए सिरे से संवारने में भी खूब भ्रष्टाचार किया गया। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पर कुल 961 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए जबकि किसी नए स्टेडियम को बनाने में इससे कहीं कम राशि खर्च होती है। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए बनाए गए स्टेडियमों में तय बजट से ज्यादा खर्च किए गए। खेलों से जुड़ी निविद में भी धांधली की गई।"
उन्होंने कहा, "अब समय आ गया है कि राष्ट्रमंडल खेलों में लूट में शामिल भागीदारों तथा उन्हें राजनीति संरक्षण देने वालों के बीच की सांठ-गांठ का पर्दाफाश किया जाए। देश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि राष्ट्र की बदनामी के लिए असली अपराधी कौन है।"
गडकरी ने कहा, "हमारा मानना है कि पूरी सच्चाई तभी सामने आएगी जब इस मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। ऐसा सिर्फ जेपीसी के माध्यम से हो सकता है। भाजपा की मांग है कि राष्ट्रमंडल खेलों में हुई करोड़ों की लूट की जांच के लिए शीघ्र एक जेपीसी का गठन किया जाए।"
गौरतलब है कि राष्ट्रमंडल खेलों के खत्म होने के बाद भ्रष्टाचार की जांच के लिए सरकार की ओर से पूर्व महालेखा परीक्षक वी.के. शुंगलू के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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