'आईएसआई की मदद से दहली थी मुम्बई' (लीड-1)
लंदन, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुम्बई में दो साल पहले हुए आतंकवादी हमले की साजिश में पाकिस्तान की प्रमुख खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसिज इंटेलीजेंस (आईएसआई) पूरी तरह से शामिल थी। भारतीय जांच अधिकारियों से पूछताछ के दौरान अमेरिका में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने यह बात स्वीकारी है।
हेडली ने मुम्बई में हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए आईएसआई के अधिकारियों से कई बार मुलाकातें भी की थीं। अमेरिका में गिरफ्तार हेडली मुम्बई हमले की साजिश का प्रमुख सूत्रधार है और वह शिकागो की अदालत में मुम्बई हमले का गुनाह कुबूल भी कर चुका है।
नया खुलासा ब्रिटेन के समाचार पत्र 'द गार्जियन' ने किया है। अखबार ने भारतीय अधिकारियों द्वारा हेडली से की गई पूछताछ की रिपोर्ट के हवाले से पूरी साजिश में आईएसआई की संलिप्तता का उल्लेख किया है। यह रिपोर्ट 109 पृष्ठों की है और इसमें आईएसआई द्वारा मुम्बई को दहलाने की साजिश में पूरी मदद देने की बात कही गई है।
इस रिपोर्ट के अनुसार पूछताछ के दौरान शिकागो की जेल में बंद पाकिस्तानी आतंकवादी हेडली ने बताया कि उसने 26 नवम्बर, 2008 की घटना की साजिश के सिलसिले में आईएसआई के अधिकारियों और आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कई शीर्ष आतंकवादियों से मुलाकात की थी। उल्लेखनीय है कि मुम्बई हमले के लिए पाकिस्तानी संगठन लश्कर को ही जिम्मेदार माना जाता है।
हेडली ने यह भी कहा कि पूरे हमले को अंजाम देने तक वह आईएसआई के संपर्क में बना रहा और इसके लिए उसे इस पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की ओर से पूरी मदद दी गई। मुम्बई हमले में लगभग 166 लोग मारे गए थे।
पूछताछ में हेडली ने भारतीय अधिकारियों को बताया, "अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के आक्रामक तेवरों और उनकी प्रतिबद्धता की वजह से लश्कर के कई सदस्यों ने उसका साथ छोड़ अफगानी जेहादियों का साथ थाम लिया। मेरा मानना है कि इसी वजह से लश्कर ने भारत में हमले की साजिश रची।"
हेडली के अनुसार मुम्बई हमले के जरिए आईएसआई कश्मीर में सक्रिय संगठनों के बढ़ते एकीकरण को रोकना चाहती थी। आईएसआई का मकसद कश्मीर के संगठनों में परस्पर बिखराव को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेना था और उनमें अपने अनुकूल भावनाएं पैदा करना था। वह पाकिस्तानी सरजमीं पर फैली आतंकवादी हिंसा को भारत ले जाना चाहती थी।
दाऊद गिलानी से डेविड हेडली बने इस आतंकवादी ने यह भी कहा, "मैंने पाकिस्तान के सैन्य खुफिया अधिकारी कर्नल कामरान से मुलाकात की थी। इसके अलावा मेजर इकबाल और मेजर समीर अली से भी मिला था। मुझे आईएसआई की ओर से 25,000 डॉलर की रकम दी गई थी ताकि भारत में हमले से पहले ठिकानों की टोह ले सकूं।"
हेडली ने पूछताछ में आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शूजा पाशा के भी इस हमले के बारे में जानकारी होने की बात कही है। उसने कहा कि मुम्बई हमले के बाद पाशा ने जेल में बंद लश्कर के एक प्रमुख आतंकवादी से मुलाकात की थी और इस साजिश को अंजाम दिए जाने की पूरी जानकारी ली थी।
इस नए खुलासे के बाद पाकिस्तान ने हर बार की तरह इस बार भी मुम्बई हमले में आईएसआई की किसी तरह की भूमिका से इंकार किया है। आईएसआई एक प्रवक्ता ने 'द गार्जियन' को बताया कि मुम्बई हमले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के शामिल होने की बात निराधार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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