गरजे बाल ठाकरे, पौत्र का राजनीतिक अभिषेक किया (लीड-2)

बाल ठाकरे और उद्धव ने केंद्र एवं राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस पार्टी तथा सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी व अशोक चव्हण से लेकर नारायण राणे जैसे कांग्रेसी नेताओं पर जम कर हमला किया।

आश्चर्यजनक रूप से स्वस्थ दिख रहे ठाकरे ने भरोसा दिलाया कि वह बहुत अच्छे हैं, यद्यपि उन्होंने कई बार सांस में तकलीफ महसूस की। इसके पहले उद्धव ने कहा कि शिव सैनिक उनके पिता के लिए टानिक की तरह हैं, जो हमेशा उन्हें तरोताजा करते रहते हैं।

बाल ठाकरे गरजे और तालियों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई। उन्होंने कहा, "कोई गलती मत करो, शिव सेना हर व्यक्ति को एक कड़ी चुनौती देगी और हम घुटने नहीं टेकेंगे। हमारी आवाज दबाई नहीं जा सकती, 50-डेसिबल ध्वनि की सीमा भी नहीं। यह केवल पुरुषों की भीड़ नहीं है, बल्कि यह बहादुर शिव सैनिकों की भीड़ है।"

अपनी पारंपरिक शैली में ठाकरे ने हर किसी की खर ली। शुरुआत भतीजे राज ठाकरे से की, लेकिन उनका नाम नहीं लिया। ठाकरे ने सवाल किया, "उन्होंने मेरी शैली को चुरा लिया है। शैली अच्छी है, लेकिन विचार कैसा है?"

हिंदू आतंकियों पर केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम के हाल के बयान का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि "वह भगवा आतंकियों को देख सकते हैं, लेकिन हरे आतंकियों को और नक्सलियों को नहीं देख सकते, जो कि नियमित रूप से देश में हमले कर रहे हैं।"

विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ठाकरे ने कहा कि देश पर हिजड़ों का शासन है। दिवंगत पंडित नेहरू ने देश को बर्बाद कर डाला।

ठाकरे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ छेड़छाड़ कर सत्ता में आई। राहुल गांधी का जिक्र करते हुए ठाकरे ने सीधे घोषणा कर डाली कि उनके भीतर नेतृत्व के गुण नहीं हैं।

भाषण से पहले ठाकरे ने 200,000 से अधिक लोगों की उपस्थिति में आदित्य को उन्होंने प्रतीक स्वरूप तलवार भेंट किया।

सबसे पहले ठाकरे की तीनों पीढ़ियों ने छत्रपति शिवाजी की मूर्ति को माल्यार्पण किया। उसके बाद ठाकरे ने अपना आसन ग्रहण किया।

माल्यार्पण की औपचारिकता के बाद आदित्य ठाकरे के सम्मुख खड़े हुए। वह नीले रंग का सामान्य-सा कुर्ता और काले रंग की पैंट पहने हुए थे।

ठाकरे ने अपने पौत्र को तलवार प्रदान किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। आदित्य ने झुक कर ठाकरे का चरण स्पर्श किया। ठाकरे ने आदित्य (20) को फूलों का एक गुलदस्ता भी दिया। आदित्य ने इसके बाद अपने पिता उद्धव के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

आदित्य इसके बाद मंच पर सामने आए। उन्होंने तलवार खींचा और उसे हवा में लहराया। वहां उपस्थित भीड़ ने उनका जोश बढ़ाया। इसके बाद आदित्य भीड़ के सामने झुक कर अभिवादन किया।

उम्मीदों पर पानी फेरते हुए आदित्य ने कोई भाषण नहीं दिया। वह दो घंटे के समारोह के दौरान पूरे समय मंच पर बैठे रहे। मंच पर उनके साथ राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रामदास कदम और पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी मौजूद थे।

आदित्य मुम्बई के मशहूर सेंट जेवियर्स कॉलेज के छात्र हैं। वह पार्टी की युवा शाखा 'युवा सेना' के जरिए अपनी राजनीतिक पारी का आगाज करेंगे। बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में पढ़ाई के दौरान आदित्य का अंग्रेजी में एक कविता संग्रह 'माई थॉट इन ब्लैक एंड व्हाइट' प्रकाशित हुआ था।

बाल ठाकरे अपने समय के मशूहर कार्टूनिस्ट थे तो उद्धव फोटोग्राफर हैं। आदित्य की रुचि साहित्य में है। उनका कविता संग्रह हिंदी और मराठी में भी छप चुका है।

आदित्य के राजनीति में आने का संकेत उद्धव ने वर्ष 2008 में ही दे दिया था। वर्ष 2009 के चुनाव में आदित्य ने शिवसेना के लिए प्रचार भी किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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