क्या शांतिपूवर्क संभव हो सकेगा बिहार विधानसभा चुनाव!

नक्सली चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं। राज्य में नक्सली और अपराधी चुनाव के दौरान शांत बैठेंगे, यह एक बड़ा सवाल है। यद्यपि आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान एक की भी जान नहीं गई और नवम्बर, 2005 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी यही स्थिति बनी थी।

परंतु चुनावी हिंसा पर गौर करें तो फरवरी, 2005 में हुए चुनाव में जहां 27 लोग चुनावी हिंसा के शिकार हुए थे, वहीं 2000 के विधानसभा चुनाव में 61 तथा वर्ष 1995 में हुए चुनाव में 53 लोग चुनावी हिंसा के भेंट चढ़े थे।

जानकार बताते हैं यह दौर बिहार के राजनीति में अपराधीकरण का स्वर्णिम काल था जिस कारण राजनीतिक हत्याएं आम हो चुकी थीं। इसके अलावा वर्ष 2001 के पंचायत चुनाव में तो हत्याओं का आंकड़ा 158 तक पहुंच चुका था जबकि 1990 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान 86 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

इधर, चुनाव आयोग ने बिहार में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए ही छह चरणों में चुनाव कराने की घोषणा की है। राजनीतक विश्लेषक सुरेन्द्र किशोर मानते हैं कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भले ही हत्याएं नहीं हुई, परंतु नक्सलियों ने कुछ मतदान केन्द्रों पर अपनी अच्छी उपस्थिति दर्ज करा दी थी।

इस बार जब सभी मतदान केन्द्रों पर केंद्रीय बल तैनात रहेंगे तो शायद नक्सलियों की हिंसा को रोका जा सके। बिहार में पेशेवर बूथ लुटेरों की संख्या कम हो गई है जिस कारण मतदान केंद्रों में आमतौर पर शांति बनी रहने की संभावना है।

इधर, पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का मानना है कि चुनाव के क्रम में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। पिछले दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में आए केंद्रीय चुनाव आयोग के दल ने सभी जिला के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों से चुनाव के दौरान मतदान केन्द्रों पर पुलिस बल की तैनाती के विषय में बात की थी।

सूत्रों के अनुसार सभी जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक ऐसे संवेदनशील मतदान केंद्रों की सूची चुनाव आयोग को सौंप रहे हैं और इसी आधार पर पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक पी़ क़े ठाकुर कहते हैं कि इस चुनाव में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों को ध्यान में रखकर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

ठाकुर ने बताया कि गत सितम्बर में 19,605 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 14 संदिग्ध नक्सली और 502 कुख्यात अपराधी हैं। उन्होंने कहा कि सितम्बर में अवैध रूप से बेचे जा रही एक लाख 41 हजार लीटर शराब भी जब्त की गई। इस दौरान 12 मिनीगन कारखाने का भंडाफोड़ किया गया जबकि एक लाख 70 हजार से ज्यादा डेटोनेटर बरामद किए गए।

पुलिस मुख्यालय के एक अन्य अधिकारी की मानें तो इस चुनाव में करीब 450 अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की जाएंगी। इनमें सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, त्वरित कार्य बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 350 कंपनियां बिहार पहुंच चुकी हैं जिन्हें क्षेत्रों में तैनात करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित अधिकांश मतदान केन्द्रों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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