भाजपा विधायकों की याचिका पर सुनवाई बुधवार को (लीड-1)

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के.एस. खेहर और न्यायमूर्ति एन. कुमार सोमवार को इन मामलों में एक राय नहीं बना पाए। खेहर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के पक्ष में थे जबकि कुमार उनसे असहमत थे।

दोनों न्यायाधीश इस बात पर सहमत थे कि भाजपा विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के पीछे विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया की कोई दुर्भावना नहीं थी।

न्यायधीशों ने यह भी स्वीकार किया कि बोपैया ने सभी नियमों व प्रक्रियाओं का पालन किया और उन्होंने अयोग्य करार दिए गए विधायकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया।

ज्ञात हो कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा ने गत 14 अक्टूबर को दूसरी बार विश्वास प्रस्ताव जीता था। इससे पहले 11 अक्टूबर को विश्वास प्रस्ताव के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के.जी.बोपैया ने विश्वास मत के पहले ही 16 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। इनमें से 11 भाजपा के थे और पांच निर्दलीय। बाद में येदियुरप्पा सरकार ने ध्वनि मत से यह विश्वास प्रस्ताव जीता था। इसके बाद अयोग्य करार दिए गए भाजपा व निर्दलीय विधायकों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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