स्वाइन फूल के टीके से बढ़ सकता है रोग का खतरा

विशेषज्ञ टीके और 'ग्यूलैन बैरे सिंड्रोम' (जीबीएस) के बीच संबंध की जांच करने के लिए अध्ययन में जुटे हैं। यह सिंड्रोम तंत्रिका तंत्र पह हमला करता है, जिससे मनुष्य पक्षाघात का शिकार हो सकता है और उसकी मौत हो सकती है।

अधिकारियों ने हालांकि, सिंड्रोम और टीके के बीच किसी संबंध से इंकार किया है, फिर भी इस बात की आशंका जताई गई है कि अमेरिका में वर्ष 1970 में लगाए गए स्वाइन फ्लू के टीके के कारण लोग नई बीमारी के शिकार हो गए थे।

समाचार पत्र 'टेलीग्राफ' के मुताबिक 'मेडिसीन एंड हेल्थ केयर प्रोडक्ट्स रेग्युलेटरी एजेंसी (एमएचआर)' ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया है कि इस संबंध में और परीक्षण किए जाने हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है, "उपलब्ध जानकारी में अनिश्चितता और मौजूदा समय के स्वाइन फ्लू के टीके को देखते हुए एच1एन1 टीके से जीबीएस के खतरे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।"

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में वर्ष 1976 में एक अलग किस्म के स्वाइन फ्लू को रोकने के लिए लोगों को टीका लगाया गया था। इस टीके से 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि स्वाइन फ्लू ने केवल एक व्यक्ति की जान ली थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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