स्तम्भ कोशिकाओं से होगा जोड़ों का इलाज
अगले 10 साल में स्तम्भ कोशिकाओं के इंजेक्शन देकर क्षतिग्रस्त जोड़ों को फिर से स्वस्थ बनाया जा सकेगा। इसके लिए घुटने या कूल्हे के कृत्रिम जोड़ नहीं लगाने पड़ेंगे।
इससे ओस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को फायदा पहुंचेगा। मांसपेशियों में लचीलापन कम होने से यह बीमारी होती है लेकिन नए इलाज से व्यक्ति को झुकने, सीढ़ियां चढ़ने, चीजों को पकड़ने या घुटनों को मोड़ने में परेशानी नहीं होगी।
समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक अब तक इसके इलाज के लिए मरीजों में कृत्रिम जोड़ लगाए जाते रहे हैं लेकिन यह थोड़ी जटिल और लम्बी प्रक्रिया होती है और हमेशा सफल भी नहीं रहती।
कृत्रिम जोड़ केवल 10 से 15 साल तक ही ठीक से काम करते हैं। इसका मतलब है कि कुछ लोगों को इसके लिए बार-बार सर्जरी करानी पड़ती है।
नए शोध में भ्रूण की स्तम्भ कोशिकाओं से अन्य प्रकार की कोशिकाएं बनाने का प्रयोग किया गया है। इससे जोड़ों के इलाज की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है।
मैंचेस्टर विश्वविद्यालय और सेंट्रल मैंचेस्टर एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया है।
अब यह प्रयोग पशुओं पर किया जाएगा और अगले दस साल में स्तम्भ कोशिकाओं से मानव के जोड़ों का भी इलाज हो सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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