स्टरलाइट संयंत्र मामले पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक बढ़ाई (लीड-1)
सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में होने वाली मामले की अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा। कम्पनी की विशेष अनुमचि याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने रोक की अवधि बढ़ा दी और स्टरलाइट से कहा कि वह उन सभी रिपोर्ट को प्रस्तुत करे जो उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई थीं।
स्टरलाइट इंडस्ट्रीज का तांबा गलाने का यह संयंत्र तमिलनाडु के तूतीकोरिन में है। स्टरलाइट इंडस्ट्रीज लंदन में रह रहे भारतीय उद्योगपति अनिल अग्रवाल के वेदांता रिसोर्सिज का हिस्सा है।
न्यायालय में 'नेशनल ट्रस्ट फॉर क्लीन इनवायरमेंट' (एनटीसीई) की पैरवी कर रहे वकील एस. एम. जाधव ने आईएएनएस को बताया, "न्यायालय इस बात को लेकर क्षुब्ध था कि कम्पनी ने 'नेशनल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट' (एनईईआरआई) की उस रिपोर्ट को नहीं सौंपा जो उसके खिलाफ थी। कम्पनी की ओर से अपने पक्ष वाली रिपोर्ट न्यालाय के समक्ष प्रस्तुत की गई। "
जाधव ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्टरलाइट को आदेश दिया है कि वह रिपोर्ट के साथ अपने पहले दिए गए हलफनामे को भी सौंपे। न्यायालय की ओर से तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) को स्थिति रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
पिछले महीने मद्रास उच्च न्यायालय ने पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने और प्रदूषण की वजह बनने के आधार पर स्टरलाइट के इस संयंत्र को बंद करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही न्यायालय ने कम्पनी से संयंत्र से जुड़े कर्मचारियों को हर्जाना देने की बात कही थी।
तूतीकोरिन संयंत्र के विस्तार पर अग्रवाल की इस कम्पनी लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। पिछले साल स्टरलाइट इंडस्ट्रीज ने इस संयंत्र की क्षमता को दोगुना करने की ऐलान किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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