दिल्ली की सड़कों पर फिर से प्रकट हुए खोमचे वाले
एक स्वयंसेवी संस्था के मुताबिक ठेले और खोमचे वाले अब सड़कों पर लौटने लगे हैं लेकिन उनका एक बहुत बड़ा तबका अभी दिल्ली से बाहर है। त्यौहारों का मौसम आने के साथ ही यह तबका खेलों की शुरुआत के दौरान ही अपने 'घर' चला गया था।
दिल्ली में ठेलों और खोमचों के माध्यम से जीवनयापन करने वाले अधिकांश लोग बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। ये लोग दशहरा और दीपावली को देखते हुए अपने पैतृक गांव चले गए हैं और अब इनके छठ के बाद ही लौटने के आसार हैं।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स (एनएएसवीआई) के रंजीत अभिज्ञान ने कहा, "खेलों की समाप्ति के साथ दिल्ली की सड़कें आबाद होने लगी हैं। बहुतेरे लोग हालांकि अपने घर लौट चुके हैं और उनके त्यौहारों का मौसम बीतने के बाद ही दिल्ली लौटने के आसार हैं।"
अभिज्ञान ने हालांकि यह भी कहा कि ठेले और खोमचे लगाकर जीवनयापन करने वाले बहुतेरे लोग दिल्ली नहीं लौटने के बारे में भी सोचने लगे हैं क्योंकि उनके मुताबिक ठेले लगाकर दिल्ली में रहना आसान नहीं है।
अभिज्ञान ने कहा, "लोगों को यह आभास हो गया है कि ठेला लगाकर जीवनयापन करना मुश्किल है। ठेला या खोमचा लगाने के लिए पुलिस और निगम कर्मियों को घूस देनी पड़ती है। इस कारण बहुतेरे लोग पंजाब जाकर मजदूरी करने और कोई अन्य काम करने पर विचार कर रहे हैं।"
अभिज्ञान ने बताया कि खेलों के दौरान सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण 2.5 लाख लोग प्रभावित हुए। इनमें ठेले वाले, खोमचे वाले और रिक्शा चलाने वाले शामिल हैं। यही नहीं, खेलों के दौरान घोषित छुट्टियों के कारण 10 लाख अन्य लोग भी प्रभावित हुए। इनमें दफ्तर जाने वाले, छात्र और मध्यम वर्ग के लोग शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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