‘मुख्यमंत्री पहले अपने भ्रष्ट विभागों से निपटें’

कलमाड़ी ने कहा कि वो खेलों को सफल होने देना चाहते थे इसलिए चुप रहे लेकिन इस चुप्पी का ये मतलब नहीं कि वो दोषी हैं.
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल तो खत्म हो गए लेकिन उससे जुड़ी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर खत्म होता नज़र नहीं आता.
आयोजन समिति के प्रमुख सुरेश कलमाड़ी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर गलत बयानी का आरोप लगाते हुए कहा है कि शीला दीक्षित जिस आयोजम समिति के कामकाज को संदेहास्पद बता रही हैं उसके आयोजन को राष्ट्रमंडल खेलों के प्रमुख माइकल फ़ैनेल बेहतरीन और सफल घोषित कर चुके हैं.
कलमाड़ी ने कहा, ''दूसरों पर इस तरह उंगली उठाना ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री पहले अपने महकमे में फैले भ्रष्टाचार से निपटें.''
मीडिया को जारी अपने बयान में कलमाड़ी ने कहा कि उन्हें इस बात की उम्मीद है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान किए गए खर्च की जांच करने वाली शुंगलु समिति, अपनी जांच के दायरे में केवल आयोजन समिति के 1,620 करोड़ के बजट को ही नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार द्वारा खर्च किए गए 16,000 करोड़ रुपए के खर्च को भी शामिल करेगी.
अपने बचाव में कलमाड़ी ने कहा कि वो खेलों को सफल होवे देना चाहते थे इसलिए चुप रहे लेकिन उनके चुप रहने का मतलब ये नहीं कि वो दोषी हैं.
कलमाड़ी ने कहा कि उन्हें लगा कि दशहरे के दिन आयोजन समिति को अपना पक्ष रखना चाहिए.
2005 में खेलों की तैयारियों को लेकर कलमाड़ी ने कहा कि खेलों के लिए स्टेडियम तैयार करना सरकारी एजेंसियों का काम था.
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का ढांचा समय पर तैयार नहीं था जिसके लिए दिल्ली सरकार ज़िम्मेदार है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की जाँच के आदेश के बाद इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी की अंदरुनी राजनीति खुलकर सामने आ गई है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक बयान में कहा था कि इस मामले में सुरेश कलमाड़ी की अध्यक्षता में काम कर रही आयोजन समिति शक के दायरे में है.
शीला दीक्षित ने अपनी प्रतिक्रिया में ये भी कहा कि केंद्र सरकार ने आयोजन समिति को 1600 करोड़ रुपए का कर्ज़ दिया था.


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