अयोध्या प्रकरण : सर्वोच्च न्यायालय जाएगा निर्मोही अखाड़ा
अखाड़ा के प्रवक्ता महंथ राम दास ने आईएएनएस को बताया, "हमारे पास सर्वोच्च न्यायालय जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। क्योंकि, 'सून्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड' ने गत 30 सितम्बर को दिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में जाने का निर्णय किया है और उसके इस निर्णय का मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने समर्थन किया है।"
महंथ ने कहा, "हमें पहले से मालूम था कि मुस्लिम समुदाय का एक धड़ा सुलह के पक्ष में नहीं है। परिस्थितियों को देखते हुए हम सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के लिए बाध्य हैं।"
अयोध्या प्रकरण का बातचीत के जरिए हल निकालने का प्रयास करने वाले पहले मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी (90) के बारे में पूछे जाने पर राम दास ने कहा, "हम अंसारी के प्रयासों की सराहना करते हैं। महंथ भास्कर दास ने भी उनकी पहल को सकारात्मक बताया है, लेकिन अब क्या किया जा सकता है।"
प्रवक्ता ने कहा, "हमें पूरे विवादित भूमि पर अधिकार रखने का हक है। साथ ही हमें यहां पूजा करने का अधिकार और प्रस्तावित मंदिर के निर्माण का भी अधिकार मिलना चाहिए।"
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की लखनऊ पीठ ने गत 30 सितम्बर को विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया है। फैसले में विवादित भूमि का एक हिस्सा राम लला, एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के लिए कहा गया है।
उधर, बोर्ड ने शनिवार को हुई बैठक के बाद कहा कि उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया है। उसने यह भी कहा कि वह कुछ शर्तो के साथ इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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