केरल में पारम्परिक रूप से शुरू हुई बच्चों की शिक्षा

केरल में मनाए जाने वाले इस उत्सव को 'विद्याआरम्भम' के नाम से जाना जाता है। इस उत्सव में शिक्षाविद, साहित्यकार, अध्यापक और राजनीतिज्ञों ने छात्रों को थाली में रखे चावल के दानों से मलयालम अक्षर लिखने में मदद की।

मूल रूप से हिंदू उत्सव 'विद्याआरम्भम' को कुछ वर्षो से चर्चो में भी मनाया जा रहा है। यहां पादरी या आमंत्रित मेहमान बच्चों को मलयालम भाषा का पहला अक्षर लिखने में मदद करते हैं।

परंपरा के अनुसार हिंदू बच्चे भगवान गणेश की स्तुति में जहां 'हरिश्री गणिपत्ये नम:' और ईसाई समुदाय के बच्चे ईसा मसीह की प्रार्थना में 'श्री येसू मसीह' लिखते हैं। इसके बाद सोने के छल्ले से बच्चे की जीभ पर मलयालम शब्द लिखा जाता है।

सुबह के समय हुई बारिश ने लोगों का उत्साह कम नहीं किया। त्रिसूर के समीप स्थित थुंचन परंबु में समारोह के लिए सर्वाधिक लोग जुटे। कोट्टायम जिले में पनचिक्कडु के सरस्वती मंदिर में लोगों की भारी भीड़ देखी गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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